नई दिल्ली: हर साल 12 जून को वर्ल्ड चाइल्ड लेबर डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन दुनियाभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम पर रोक लगाना है. और इस बारे में जागरुकता फैलाना है. इस दिन की शुरुआत साल 2002 में की गई थी. हर साल 12 जून को विश्व दिवस बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के साथ-साथ दुनिया भर के लाखों लोगों को जागरूक करता है और उनकी मदद के लिए कई कैंपेन भी चलाए जाते हैं. Also Read - World Day Against Child Labour 2020 Quotes: समाज में जागरुकता फैलाने के लिए विश्व बाल श्रम दिवस के मौके पर शेयर करें ये कोट्स

वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर का इतिहास

5 से 17 आयु वर्ग के कई बच्चे ऐसे काम में लगे हुए हैं जो उन्हें सामान्य बचपन से वंचित करते हैं, जैसे कि पर्याप्त शिक्षा, उचित स्वास्थ्य देखभाल, अवकाश का समय या बस बुनियादी स्वतंत्रता। 2002 में, संयुक्त राष्ट्र की संस्था जो काम की दुनिया को नियंत्रित करती है, इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने इसी वजह से वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर लॉन्च किया। 2015 में विश्व नेताओं द्वारा अपनाए गए कई  विकास लक्ष्यों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिए नए सिरे से वैश्विक प्रतिबद्धता शामिल की गई थी. इसमें विशेष रूप से, वैश्विक समुदाय से सतत विकास लक्ष्यों का 8.7 लक्ष्य पूरा करने की ठानी जैसे, ‘मजबूर श्रम को खत्म करने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करना,  मानव तस्करी को समाप्त करना और  बाल श्रम के सबसे बुरे रूपों के उन्मूलन को सुरक्षित करना.’

वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर का महत्व

ILO की रिपोर्ट ‘बाल श्रम के वैश्विक अनुमान परिणाम और रुझान, 2012-2016’ में कहा गया है कि पाँच और 17 वर्ष की उम्र के बीच 152 मिलियन बच्चों को विशेष परिस्थितियों में श्रम करने को मजबूर किया जा रहा है. इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि 152 मिलियन में से 73 मिलियन बच्चे खतरनाक काम करते हैं. उन्हें मजदूरी कम मिलती है. बच्चों के काम करने की मूल समस्या निर्धनता और अशिक्षा है. जबतक देश में भुखमरी रहेगी तबतक हम इस समस्या से निजात नहीं पा पाएंगे.