World Diabetes Day 2019 यानी विश्‍व मधुमेह दिवस हर साल 14 नवंबर को मनाया जाता है. इस दिन लोगों को डायबिटीज को लेकर जागरुक किया जाता है.

Diabetes
डायबिटीज देश में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है. एक शोध की मानें तो पिछले 25 बरस में इस बीमारी के मामलों में 64 प्रतिशत इजाफा हुआ है और विशेषज्ञ इस बढ़ोतरी को देश की आर्थिक प्रगति के साथ जोड़कर देख रहे हैं. इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि आने वाले छह बरसों में देश में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 13.5 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जो वर्ष 2017 में 7.2 करोड़ थी.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड एवेल्यूएशन और पब्लिक हैल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की नवंबर 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 25 बरस में भारत में डायबिटीज के मामलों में 64 प्रतिशत का इजाफा हुआ. अब विश्व बैंक की एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो 1990 में भारत की प्रति व्यक्ति आय 24,867 रूपए थी, जो 2016 में बढ़कर 1,09,000 हो गई. इसका सीधा अर्थ है कि खुशहाली बढ़ने के साथ-साथ मधुमेह के रोगी भी बढ़ते जा रहे हैं.

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शोध के अनुसार, साल 2017 में दुनिया के कुल डायबिटीज रोगियों का 49 प्रतिशत हिस्सा भारत में था और 2025 में जब यह आंकड़ा 13.5 करोड़ पर पहुंचेगा तो देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बड़ा बोझ होने के साथ ही आर्थिक रूप से भी एक बड़ी चुनौती पेश करेगा.

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर्स
धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन, डॉ गौरव जैन के अनुसार, ”डायबिटीज में शरीर में इन्सुलिन बनाने कि प्रक्रिया बाधित या कम हो जाती है. इन्सुलिन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और इस प्रक्रिया के प्रभावित होने से शरीर के प्रमुख अंगों का संचालन बाधित होने लगता है. टाइप 1 डायबिटीज में हमारे शरीर में इन्सुलिन बनना बंद हो जाता है और मरीज को मुख्यत: इन्सुलिन थैरेपी पर आश्रित होना पड़ता है. टाइप 2 डायबिटीज में शरीर में इन्सुलिन के इस्तेमाल कि प्रक्रिया बाधित होती है. यह टाइप 1 से कम घातक होती है और आम है. इसमें दवाएं खाकर बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है.
(एजेंसी से इनपुट)

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