विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि सरकारें और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जैसे अन्य उत्पादों के प्रचार पर आसानी से विश्वास न करें. बयान में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से होने वाला नुकसान कम है, यह तंबाकू कंपनियों के प्रचार की एक रणनीति है. Also Read - WHO की एक्‍सपर्ट टीम COVID-19 वायरस की उत्‍पत्ति का पता लगाने चीन के वुहान शहर में पहुंची

डब्लूएचओ ने जारी 2019 वैश्विक तंबाकू महामारी रिपोर्ट में बताया है कि लंबे समय में तंबाकू उद्योग, तंबाकू नियंत्रण के लिए अपनाए जा रहे कदमों के खिलाफ काम कर रहा है. Also Read - भारत में कोरोना के टीकाकरण से पहले WHO की चेतावनी- दूसरा साल हो सकता है और कठिन

कई उद्योगों का कहना है कि पारंपरिक सिगरेट के बदले इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट सुरक्षित है और ये सिगरेट पीने की आदत छोड़ने में मदद करता है. प्रमाण के अनुसार अमेरिकी किशोरों में ई-सिगरेट तेजी से लोकप्रिय हो रही है. Also Read - क्या छिपा रहा चीन? Covid 19 की जांच कर रही WHO टीम की यात्रा पर लगाई रोक

डब्लूएचओ ने रिपार्ट जारी की थी कि इस बात के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं है. जब सिगरेट पीने वाले पूरी तरह से निकोटीन छोड़ देंगे, तभी उन्हें लाभ मिलेगा. अमेरिकी

खाद्य और औषधि प्रशासन ने हाल के वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है.

डब्लूएचओ तंबाकू नियंत्रण अधिकारी विनायक प्रसाद ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और पारंपरिक सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान एक जैसे हैं, सबसे बड़ा अंतर यह है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में कोई स्पष्ट धुआं नहीं है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट बाजार के पर्यवेक्षण को मजबूत करना चाहिए, जो डब्लूएचओ का एक स्पष्ट लक्ष्य भी है.

क्‍या है ई-सिगरेट
ई-सिगरेट को इलेक्ट्रानिक सिगरेट भी कहा जाता है. इसे कई लोग पीवी या पर्सनल वेपोराइजर भी कहते हैं. ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक इनहेलर होता है. इसमें मौजूद लिक्विड को एक खास तरह की प्रक्रिया के द्वारा भाप में बदल दिया जाता है. इससे पीने वाले को उसी तरह का एहसास होता है, जो सिगरेट पीने वाले को होता है.