नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सातों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है. अब देश को 23 मई का इंतजार है, जिस दिन 542 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आएंगे. इस चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन की ढेरों शिकायतें आईं. इनमें न सिर्फ नेताओं के विवादित बयानों की शिकायतें थीं, बल्कि पेड न्यूज और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर आपत्तिजनक पोस्ट्स से जुड़े मामले भी सामने आए. निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले पेड न्यूज पर रोक लगाने और सोशल मीडिया पर चुनाव को प्रभावित करने वाले पोस्ट्स न करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन सातों चरणों के मतदान के बाद जब आप ऐसी शिकायतों की संख्या पर गौर करेंगे तो पता चलेगा कि आयोग के निर्देशों की धज्जियां उड़ाने में राजनीतिक दलों ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी.

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चुनाव आयोग ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान 647 पेड न्यूज के मामले पाए गए, जबकि विभिन्न सोशल मीडिया मंचों से 909 पोस्ट हटाए गए. सात चरणों में हुए लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान रविवार को संपन्न हुआ. आयोग के अनुसार, पेड न्यूज के कुल मामलों में से 57 मामले सातवें चरण के मतदान के दौरान पाए गए, जबकि छठे चरण में एक, पांचवें चरण में आठ, चौथे चरण में 136, तीसरे चरण में 52, दूसरे चरण में 51 और सबसे ज्यादा 342 मामले पहले चरण में पाए गए.

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आयोग ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान पेड न्यूज के 1,297 मामले पाए गए थे, जो सबसे ज्यादा खराब स्थिति थी. चुनाव आयोग ने पहली बार सोशल मीडिया के लिए ऐच्छिक आचार संहिता लागू की थी और सभी चुनाव क्षेत्रों में विशेषज्ञों और नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया था. आयोग ने बताया कि फेसबुक से 650 पोस्ट, ट्विटर से 220, शेयरचैट से 31 और गूगल से पांच व व्हाट्सएप से तीन पोस्ट हटाए गए. पेड न्यूज और सोशल मीडिया पोस्ट्स से जुड़ी शिकायतों की इन संख्या को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि चुनाव में आचार संहिता की क्या स्थिति रही होगी.

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आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने में न सिर्फ विपक्षी दल आगे रहे, बल्कि कई बार सत्ताधारी दल के प्रमुख नेताओं के खिलाफ भी ऐसी शिकायतें पाई गईं. और तो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी इस लोकसभा चुनाव में आधा दर्जन से ज्यादा बार आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतें निर्वाचन आयोग की दी गईं. इसके अलावा केंद्र में सत्तारूढ़ दल भाजपा के अध्यक्ष, प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष समेत कई अन्य दलों के नेताओं के ऊपर भी ऐसी शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से अधिकतर मामलों में चुनाव आयोग ने कार्रवाई की तो वहीं, कुछ शिकायतों को लेकर उसके ऊपर पक्षपात के आरोप भी लगे.

(इनपुट – एजेंसी)

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