नई दिल्ली. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को गुजरात के गांधीनगर सीट से नामांकन दाखिल किया. इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिअद सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल तथा लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. खास बात है कि ये सीट बीजेपी का गढ़ रही है. पार्टी यहां से 30 साल से लगातार जीत दर्ज करती रही है.

गांधीनगर की सीट पर अभी लालकृष्ण आडवाणी सांसद हैं. वह साल 1998 से लगातार यहां के सांसद हैं. लेकिन खास बात ये है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी यहां से सांसद रह चुके हैं. इतना ही नहीं गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला भी यहां से सांसद रह चुके हैं. ऐसे में यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम है.

अमित शाह इसलिए हैं महत्वपूर्ण
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए भी यह सीट काफी महत्वपूर्ण है. यही वह सीट है जहां से अमित शाह के चुनाव मैनेजमेंट पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की नजर पड़ी थी. अमित शाह 23 साल से इस सीट के संयोजक हैं. पहली बार साल 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी यहां से चुनाव लड़े थे, तब वे यहां के संयोजक बनाए गए थे. तब से इस सीट पर अमित शाह की रणनीति की वजह से बीजेपी लगातार जीत दर्ज करती रही है.

दूसरी सीटों पर भी पड़ेगा असर
अमित शाह को इस सीट से मैदान में उतारा गया तो चर्चा शुरू हुई कि लालकृष्ण आडवाणी को पार्टी ने किनारे कर दिया है. लेकिन अमित शाह के इस सीट से लड़ाने से पार्टी को अपने मिशन -26 में मदद मिलेगी. एक तो अमित शाह का मैनेजमेंट और दूसरा राज्य की दूसरी सीटों पर इसका पड़ने वाला असर. ऐसे में अमित शाह के लिए ये सीट जरूरी है.

विपक्ष में कौन है
बीजेपी का गढ़ होने की वजह से विपक्षी पार्टियों को लगातार यहां संघर्ष करना पड़ा है. इस बार कांग्रेस और एनसीपी यह सीट जीतने के लिए नए सिरे से विचार कर रही है. गुजरात के पूर्व सीएम और इसी सीट से बीजेपी के सांसद रह चुके शंकर सिंह वाघेला एनसीपी ज्वाइन कर लिए हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह एनसीपी के टिकट पर इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसे में यहां का चुनाव काफी रोचक हो सकता है.