भाजपा ने बागपत में केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया है और यहां अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी गठबंधन के उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने यहां उम्मीदवार नहीं दिया है. यहां भी नरेंद्र मोदी और भाजपा की चिंता की वही वजहें दिखती हैं जो मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और सहारनपुर में हैं. स्थानीय सांसद को फिर से टिकट दिए जाने से असंतोष और गठबंधन की मजबूती.

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करने वाले हर वर्ग में हैं. मुजफ्फरनगर में चाय की एक छोटी दुकान चलाने वाले हैदर अली ने चुनाव का जिक्र करते ही बिना रुके मोदी की खूबियां गिनानी शुरू कर दी और फैसला भी सुना दिया कि “मेरा वोट तो मोदी को ही मिलेगा.” मोदी के प्रति मुस्लिम समुदाय की सहानुभूति के बारे में ज्यादा खोजबीन करने पर लोग बताते हैं कि 2013 में जाट व मुस्लिम समुदाय के बीच हुए दंगे का डर अब तक कायम है और मुस्लिम समुदाय में कमजोर तबका सत्तारूढ़ दल के खिलाफ अपनी राय जाहिर कर किसी तरह का जोखिम नहीं मोल लेना चाहता.

सहारनपुर-बागपत रोड से लगे गांव खटकाहेड़ी में बढ़ई का काम करने वाले अक्षय कुमार ने पूछने पर बिना लाग लपेट के कहा कि वह नरेंद्र मोदी को वोट देगा. यहां से उम्मीदवार कौन है, यह पूछने पर उसका जवाब था “मालूम नहीं.” मोदी को वोट देने का कारण पूछने पर उसने कहा, कानून व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है.

मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत और गाजियाबाद में उम्मीदवार न बदलने से भाजपा कार्यकर्ता यदि नाराज हैं तो कैराना में उनकी नाराजगी उपचुनाव में उम्मीदवार रहीं मृगांका सिंह को टिकट न दिए जाने से है. मृगांका इस इलाके में प्रभावशाली गूर्जर नेता और पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी हैं. हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने कैराना से मृगांका को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार तबस्सुम हसन से चुनाव हार गईं. इसके पहले वह कैराना से ही विधानसभा का चुनाव भी हार चुकी थीं. बावजूद इसके मृगांका को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें इस बार फिर मौका देगी. भाजपा ने मृगांका के बजाय गूजर समुदाय से ही दूसरे नेता प्रदीप चौधरी को यहां से टिकट दिया है.