अहमदाबाद: गुजरात में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. ओबीसी समाज का चेहरा माने जाने वाले नेता व विधायक अल्‍पेश ठकोर ने बुधवार को दो अन्‍य विधायकों धव‍लसिंह ठकोर और एमएलए भरतजी ठकोर के साथ कांग्रेस पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया है. ये कदम अल्‍पेश ने अपने संगठन गुजरात क्षत्रीय ठाकोर सेना के कड़े रुख के बाद उठाया है.  कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद ठाकोर क्षत्रिय सेना संगठन के नेता व विधायक अल्पेश ठाकोर ने कहा, मैं भाजपा में शामिल नहीं होउंगा. मैं और मेरे दो विधायक धवलसिंह ठाकोर और विधायक भरतजी ठाकोर, जिन्होंने आज कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, हमारे 5 साल के कार्यकाल को विधायक के रूप में पूरा करेंगे.

कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर द्वारा गठित एक संगठन गुजरात क्षत्रीय ठाकोर सेना ने कांग्रेस से अपने संबंध पर संजीदा होने का निर्णय लिया है और विधायक से पार्टी से इस्तीफा देने और 24 घंटे के भीतर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा है. बता दें कि गुजरात में एक प्रमुख ओबीसी नेता के रूप में उभरने के बाद अल्‍पेश 2017 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए और पाटन जिले में राधानपुर सीट से चुनाव जीते थे.

अल्पेश ठाकोर ने कहा, ”मैं भाजपा में शामिल नहीं हो रहा हूं। मैं विधायक के रूप में इस्तीफा नहीं दे रहा हूं. मैं किसी भी लोकसभा उम्मीदवार (कांग्रेस या भाजपा का) के लिए चुनाव प्रचार करने नहीं जा रहा हूं. मैं ठाकोर सेना के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करूंगा जो बनासकांठा लोकसभा सीट और ऊंझा विधानसभा सीट (उपचुनाव) से लड़ रहे हैं.

उन्होंने गुजरात के कांग्रेस प्रमुख अमित चावड़ा को लिखे पत्र में कहा कि वह अपमान और धोखे की वजह से पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं. ठाकोर ने कहा, मैं ऐसी पार्टी में नहीं रह सकता, जहां मेरा अपमान किया जा रहा है, अनदेखी की जा रही है और धोखा दिया जा रहा है. उन्होंने पत्र में लिखा, ” मेरे समुदाय के गरीब युवा नाराज और खफा हैं, क्योंकि उनकी अनदेखी की जा रही है और अपमान किया जा रहा है. मेरे लिए ठाकोर सेना सर्वोच्च है…मेरी सेना ने मुझसे कहा कि यदि वहां हमारी अनदेखी हो रही है, अपमान किया जा रहा है और धोखा दिया जा रहा है तो मैं पार्टी छोड़ दूं.”

वहीं, अमित चावड़ा ने कहा कि वह मीडिया में कुछ भी कहने से पहले ठाकोर से बात करेंगे. ठाकोर ने बाद में कहा कि वह भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान ठाकोर सेना ने लगभग 43 सीट जिताने में कांग्रेस की मदद की. लेकिन चुनाव खत्म हो जाने पर हमारे युवाओं को दरकिनार किया गया, यहां तक कि अपमानित किया गया. मैंने पार्टी नेताओं से अपने संगठन में हमारे युवाओं को उपयुक्त पद देने के लिए बार-बार कहा.’’ संवाददाता सम्मेलन में ठाकोर के साथ उनके समुदाय के दो विधायक धवल सिंह जाला और भरत ठाकोर भी थे.

ओबीसी नेता ने दावा किया कि गुजरात में कुछ कांग्रेस नेता चुनाव टिकट बेच रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गुजरात के कांग्रेस प्रभारी राजीव सातव ने हमारे युवाओं को उचित पद दिए जाने के मेरे बार-बार के आग्रह के बावजूद कुछ नहीं किया. इससे पहले बुधवार को गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना ने ठाकोर को अल्टीमेटम दिया था कि वह 24 घंटे के भीतर कांग्रेस छोड़ दें.

इस बाद माना जा रहा था कि ठाकोर कांग्रेस छोड़ सकते हैं, क्योंकि वह स्थानीय पार्टी नेतृत्व से नाखुश हैं. हालांकि, वह पाटन लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने उनके बजाय पूर्व सांसद जगदीश ठाकोर को तवज्जो दी. संगठन के एक सदस्य जगत ठाकोर ने कहा, मंगलवार देर रात यहां कोर समिति की बैठक के दौरान ठाकोर सेना ने कांग्रेस से नाता तोड़ने का प्रस्ताव पारित किया. निर्णय लेने से पहले हमने अल्पेश ठाकोर से सलाह-मशविरा नहीं किया.

पार्टी ने साबरकांठा लोकसभा सीट से संगठन के एक सदस्य को टिकट देने की ठाकोर सेना की मांग को भी नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा, बैठक के बाद हमने उनसे 24 घंटे के भीतर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा है. अगर वह अभी भी कांग्रेस में रहना चाहते हैं तो उन्हें ठाकोर सेना छोड़नी होगी. और अगर वह हमारे साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें पार्टी और विधायक पद से इस्तीफा देना होगा.” उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन सहित महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कांग्रेस ठाकोर सेना की अनदेखी कर रही है. संगठन के प्रमुख अल्पेश ठाकोर बैठक में उपस्थित नहीं थे. ओबीसी नेता ने दावा किया उनका समुदाय और समर्थक ठगा हुआ और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.