नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में बने सियासी हालात को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आखिरी दो चरणों के मतदान के लिए अपनी पारंपरिक रणनीति के तहत चुनाव लड़ने का फैसला किया है. पिछले 5 चरणों के चुनावों के शुरुआती आकलन से मिले रुझानों के आधार पर पार्टी ने यह रुख अपनाने का निर्णय लिया है. प्रदेश में अगले दो चरणों में क्रमशः 14 और 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव होना है. इन दोनों दौर में जिन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उन पर पिछले चुनाव में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल को जीत मिली थी. लेकिन इस बार सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की ‘मजबूती’ को देखते हुए, इससे पार पाने के लिए भाजपा ने बूथ-मैनेजमेंट की अपनी पुरानी रणनीति पर चलने का निर्णय लिया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 12 और 19 मई को होने वाले मतदान के लिए दो दिन पहले चुनाव प्रचार समाप्त होंगे. इसके बाद के अगले 48 घंटों में मतदाताओं से सीधे संपर्क की भाजपा ने योजना बनाई है. पार्टी को उम्मीद है कि वोटिंग से पहले आखिरी समय तक की जाने वाली इस कवायद से वह मतदाताओं तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच बना सकेगी और उन्हें भाजपा सरकार की नीतियों, पीएम मोदी की साख और अपने मुद्दों के बारे में बता सकेगी. पार्टी को भरोसा है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद और मतदान से पहले के 48 घंटों की बूथ-मैनेजमेंट तकनीक उसे ज्यादा से ज्यादा सीटें जितवाने में सक्षम होगी.

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48 घंटे के बूथ-मैनेजमेंट प्लान के तहत भाजपा के हर कार्यकर्ता को एक ‘परिवार-पर्ची’ दी जाएगी. इसमें संबंधित बूथ क्षेत्र में रहने वाले परिवार के मुखिया का नाम होगा और अन्य विवरण होगा. चुनाव से पहले भाजपा कार्यकर्ता हर परिवार से मिलेंगे और उन्हें वोट डालने के लिए जागरूक करेंगे. पार्टी की योजना है कि इस प्लान के जरिए वह हर बूथ के सभी मतदाताओं से संपर्क बना सकेगी. अखबार के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का यह मानना है कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान चुनावी माहौल के बावजूद 60 प्रतिशत से अधिक मतदाता पीएम मोदी और भाजपा की नीतियों का समर्थन करते हैं. ऐसे सभी मतदाता बूथ तक पहुंचें तो भाजपा को निश्चित रूप से इस चुनाव में फायदा मिलेगा.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इस लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के साथ हुए अब तक के विभिन्न चरणों के मतदान में भाजपा की कड़ी टक्कर देखने को मिली है. ऐसे में आखिरी दो चरणों के मतदान में भी कहीं कोई कोर-कसर न रह जाए, इसके लिए पार्टी आलाकमान से लेकर जमीनी कार्यकर्ता, सभी लगे हुए हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि आज की भाजपा, अटल बिहारी वाजपेयी या लालकृष्ण आडवाणी वाली पार्टी नहीं है. बल्कि यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पार्टी है. इन दोनों नेताओं की राजनीति और चुनाव लड़ने की शैली, पुराने नेताओं के मुकाबले काफी अलग है.

भाजपा नेता ने अखबार को बताया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह हर चुनाव को एक ‘जंग’ की तरह लेते हैं और आखिरी दम तक संघर्ष में विश्वास रखते हैं. क्षेत्र और चुनाव, ये दोनों नेता हर गतिविधि पर नजर रखते हैं. खुद मेहनत करते हैं और अपने कार्यकर्ताओं से भी जमीन पर इतनी ही मेहनत की अपेक्षा रखते हैं. इसलिए यूपी में होने वाले अंतिम दो चरणों के चुनाव में भी भाजपा कार्यकर्ताओं को आखिरी दम तक संघर्ष करने को कहा गया है.