भोपाल: टिकट बंटवारा किसी भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होती है और इसमें पार्टी कई नेताओं की नाराजगी असंतोष बढ़ भी जाता है. बीजेपी और मोदी सरकार के लिए केंद्र में दोबारा वापसी सबसे बड़ी चुनौती है और इसी के मद्देनजर पार्टी संभल-संभल कर टिकट बांट रहीं है. कई वर्तमान सांसदों के टिकट भी काट दिए हैं तो कुछ दोबारा रिपीट भी कर रही है. इस बीच आगामी लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में टिकट वितरण को लेकर बीजेपी के कई नेताओं में नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है. इसके मद्देनजर पार्टी चुनाव से पहले ही डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशों में भी जुटी हुई. पार्टी ने मुरैना सांसद अनूप मिश्रा का टिकट काट दिया था, लेकिन अब उन्‍हें मनाने की कोशशि में जुट गई है. इसके बाद आसार दिखाई दे रहे हैं कि मिश्रा को ग्वालियर लोकससभा सीट से उतारा जा सकता है. यहां से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सांसद हैं, जिन्‍हें ग्‍वालियर की बजाय मिश्रा की सीट मुरैना से टिकट दे दिया गया था.

बता दें कि मध्‍य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटें हैं. वर्तमान में 26 पर बीजेपी और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है. भाजपा ने अब तक 14 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. भाजपा ने पांच वर्तमान सांसदों का टिकट काटा है. टिकट काटे जाने को लेकर भाजपा में विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं. वहीं, शहडोल से एमपी ज्ञान सिंह और भिंड के पूर्व सांसद अशोक अर्गल को भी टिकट नहीं दिया गया है. इसके चलते उन्‍होंने खुले तौर पर अपनी नाराजगी जता दी है. अर्गल कांग्रेस के संपर्क में हैं. भिंड संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद अशोक अर्गल ने टिकट न मिलने पर नाराजगी जाहिर की है. भाजपा ने यहां से संध्या राय को उम्मीदवार बनाया है.

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, अर्गल कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में हैं. सिंधिया से उनकी बुधवार को मुलाकात भी हो चुकी है. अर्गल कांग्रेस में जाने का मन बना चुके हैं, साथ ही वे भिंड से कांग्रेस का टिकट चाहते हैं.

शहडोल से सांसद ज्ञान सिंह ने टिकट काटे जाने पर सख्त नाराजगी जताई है. ज्ञान सिंह ने मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान टिकट वितरण को लेकर अपना ऐतराज जाहि‍र कर दिया और और कहा कि वे गरीब हैं, इसलिए उनका टिकट काटा गया है. भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुई हिमाद्री सिंह को उम्मीदवार बनाया है. इस ज्ञान सिंह ने आपत्ति जताते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की धमकी तक दे डाली है.

वहीं, टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र से वर्तमान सांसद और बीजेपी द्वारा उम्मीदवार बनाए गए मंत्री वीरेंद्र खटीक का स्थानीय नेता विरोध कर रहे हैं. वहीं, इस संसदीय क्षेत्र के बाहर खजुराहो संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत चंदला विधानसभा के पूर्व विधायक आर.डी. प्रजापति ने बुधवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर उम्मीदवार में बदलाव की मांग की. प्रजापति का कहना है कि अगर उम्मीदवार नहीं बदला गया तो भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा.

दरअसल, प्रजापति को इस बार विधानसभा में बीजेपी ने इसलिए टिकट नहीं दिया था कि प्रजापति के खिलाफ भारी असंतोष और नाराजगी थी. बीजेपी ने प्रजापति के बेटे राजेश प्रजापति को टिकट दिया था. भारी असंतोष के बावजूद प्रजापति का बेटा चुनाव में इसलिए मतदान से पहले थोड़ा बढ़त बना ली थी कि पूर्व मुख्‍यमंत्री व केंद्रीय उमा भारती ने आरडी प्रजापति के बेटे के पक्ष में प्रचार कर दिया था. इसके बाद राजेश प्रजापति महज 700-800 वोटों से जीत पाया था. बता दें कि चंदला के पूर्व विधायक आरडी प्रजापति अक्‍सर विवादित बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं और कई बार पार्टी की छवि का सवाल उठ खड़ा होता था. प्रजापति विधानसभा चुनावों के बाद से ही टीकमगढ़ की आरक्ष‍ित सीट में जनसंपर्क में जुटे हुए थे और इस कोशिश में थे कि बीजेपी उन्‍हें टिकट दे दे. (इनपुट: एजेंसी)