टीकमगढ़ः उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की आठ लोकसभा सीटों पर कहीं कांग्रेस तो कहीं सपा बसपा गठबंधन ने चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. हाल ही में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड क्षेत्र से मजबूत बढ़त के आधार पर राज्य की सत्ता में 15 साल बाद कांग्रेस की वापसी ने उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती बुंदेलखंड की चार सीटों पर कांग्रेस को मजबूती प्रदान की है, वहीं सपा बसपा गठबंधन का असर मध्य प्रदेश की चार सीटों पर दिख रहा है.

पिछले चुनावों में बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश की चार सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहता था. जबकि इस क्षेत्र से उत्तर प्रदेश की चार सीटों पर सपा, बसपा और भाजपा मुख्य मुकाबले रहती थी.

इस लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड क्षेत्र में मध्य प्रदेश की सीटों पर सपा बसपा गठबंधन ने राज्य के अन्य क्षेत्रों की तुलना में चुनावी तस्वीर को बदल दिया है. उत्तर प्रदेश की तरह मध्य प्रदेश में भी सपा बसपा ने गठबंधन के तहत ही विभिन्न सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं.

उल्लेखनीय है कि 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश की चार (झांसी, जालौन, बांदा और हमीरपुर) और 29 सीटों वाले मध्य प्रदेश की चार (टीकमगढ़, खजुराहो, भिंड और गुना) सीट बुंदेलखंड क्षेत्र में शामिल हैं. इन आठ सीटों में मध्य प्रदेश की टीकमगढ़ सीट को छोड़कर बाकी सभी सात सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और सपा बसपा गठबंधन के उम्मीदवार मुख्य मुकाबले में हैं.

पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने बताया कि इस बार कांग्रेस को बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर बेहतर चुनाव परिणाम मिलेंगे. झांसी से पूर्व सांसद जैन की दलील है कि लोगों ने संप्रग सरकार में बुंदेलखंड पैकेज और केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय जैसे फैसलों को हकीकत में तब्दील होते देखा. साथ ही जनता ने यह भी देखा कि किस तरह से मोदी सरकार के वादे एवं दावे पिछले पांच साल में जुमले साबित हुये.

जैन का मानना है कि मतदाता यह भी जानते हैं कि सपा बसपा गठबंधन सहज नहीं बल्कि महज मजबूरी है. ऐसे में कांग्रेस भाजपा को सीधी टक्कर दे रही है. वहीं, सपा के राज्यसभा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद कांग्रेस पर चुनाव में भाजपा को परोक्ष मदद पहुंचाने का आरोप लगाते हुये कहते हैं कि सपा बसपा गठबंधन ही पूरे प्रदेश में भाजपा को सीधी चुनौती दे रहा है. उनकी दलील है कि उत्तर प्रदेश के अलावा बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर भी भाजपा के सामने कांग्रेस नहीं बल्कि सपा मुख्य प्रतिद्वंद्वी है.

त्रिकोणीय मुकाबले की हकीकत को स्वीकार करते हुये भाजपा के झांसी से विधायक रवि शर्मा का कहना है कि सपा बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच दूसरे स्थान पर आने का मुकाबला चल रहा है. शर्मा ने कहा कि सोमवार को उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड की तीन सीटों पर हुये मतदान से भी तस्वीर साफ हो गयी कि भाजपा पिछले चुनाव की तर्ज पर सभी आठ सीटों पर जीत की ओर अग्रसर है.

बुंदेलखंड की झांसी, हमीरपुर और जालौन सीट पर चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान हो गया है. टीकमगढ़, खजुराहो और बांदा सीट पर पांचवे चरण में छह मई को मतदान होगा. गुना और भिंड सीट पर ग्वालियर तथा मुरैना के साथ छठे चरण में 12 मई को मतदान होगा. पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट (गुना) को छोड़कर सभी सात सीटें भाजपा की झोली में गयी थी. तीनों प्रमुख दलों ने बुंदेलखंड के जटिल जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुये सभी आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

जैन ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की दलील देते हुये कहा कि अब तक सपा बसपा को पिछड़ों एवं दलितों की पार्टी समझा जाता था लेकिन इस मिथक को तोड़ते हुये कांग्रेस ने बुंदेलखंड में पिछड़े वर्गों को तरजीह दी है.

झांसी लोकसभा क्षेत्र से सांसद उमा भारती के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के बाद भाजपा ने उनकी जगह इस बार चुनाव मैदान में उद्योगपति अनुराग शर्मा को उतारा है. शहरी क्षेत्र में सवर्ण मतदाताओं की बहुलता को देखते हुये भाजपा उम्मीदवार बनाये गये शर्मा का मुकाबला सपा के श्याम सुंदर सिंह और कांग्रेस के शिवशरण कुशवाहा से है. ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़े वर्गों की बहुलता के मद्देनजर सपा ने श्याम सुंदर यादव और कांग्रेस ने कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है.

हमीरपुर से कांग्रेस ने प्रीतम लोधी और बसपा से दिलीप सिंह को उम्मीदवार बनाया है जबकि भाजपा ने मौजूदा सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल पर ही दांव लगाया है. वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा ने हालांकि केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को इस बार ग्वालियर के बजाय मुरैना से चुनाव मैदान में उतारा है. तोमर का मुकाबला बसपा के करतार सिंह भड़ाना से है.

इसी प्रकार बांदा सीट पर सपा ने पूर्व सांसद श्यामा चरण गुप्ता, कांग्रेस ने दुर्दांत दस्यु ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल और भाजपा ने विधायक आर के पटेल को टिकट दिया है. बांदा से मौजूदा सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा को टिकट नहीं देने के कारण सपा और कांग्रेस उम्मीदवार का पलड़ा भारी होने से इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है. इस सीट पर भाजपा ने विष्णुदत्त शर्मा और कांग्रेस ने कविता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है.

उधर, गुना सीट पर कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती दे रहे बसपा उम्मीदवार लोकेन्द्र सिंह धाकड़ ने मतदान से महज कुछ दिन पहले कांग्रेस का दामन थाम कर चुनावी मुकाबले को भाजपा बनाम कांग्रेस बना दिया है.