वाराणसी: लोकसभा चुनाव 2019 में शानदार परिणाम के आने बाद पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार को अपनी संसदीय सीट काशी पहुंचे,
जहां उन्‍होंने देश के 12 ज्‍योर्तिलिंगों में से एक बाबा विश्‍वनाथ की पूजा-अर्चना की. इसके बाद उन्‍होंने अपनी लोकसभा सीट वाराणसी में लोगों को धन्‍यवाद देते हुए कहा मैं काशी के संगठन से जुड़े लोगों का, हर कार्यकर्ता का और हर समर्थक का इस बात के लिए आभार करता हूं कि उन्होंने इस चुनाव को जय-पराजय के तराजू से नहीं तोला. उन्होंने चुनाव को लोक संपर्क, लोक संग्रह, लोक समर्पण का पर्व माना. इस चुनाव की सभी कसौटियों पर आप डिस्टिंक्शन मार्क्स के साथ पास हुए हैं, इसलिए आप सभी अभिनंदन के पात्र हैं.

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वाराणसी से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए मोदी ने जनता को धन्यवाद देते हुए कहा, देश के लिए मैं प्रधानमंत्री हूं,  लेकिन आपके लिए मैं आपका सांसद और सेवक हूं. प्रधानमंत्री ने अपने खिलाफ चुनाव लड़ने वाले प्रतिद्वंद्वियों के प्रति भी आभार
जताया. पीएम ने इस मौके पर ये खास बातें कहीं:-

– यहां की बेटियों ने जो स्कूटी यात्रा निकाली उसकी पूरे देश में और सोशल मीडिया में बड़ी चर्चा है, स्कूटी पर बैठकर हमारी बेटियों
ने पूरी काशी को अपने सिर पर बैठा लिया था.

– आज उत्तर प्रदेश देश की राजनीति को नई दिशा दे रहा है. 2014 हो, 2017 हो या 2019 हो, ये हैट्रिक छोटी नहीं है. उत्तर प्रदेश
के गांव का गरीब व्यक्ति भी देश की सही दिशा के बारे में सोचता भी है और उस दिशा में चलता भी है.

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– चुनाव परिणाम वो तो एक गणित होता है. 20वीं सदी के चुनावों के हिसाब-किताब भी गणित और अंकगणित के दायरे में चले होंगे, लेकिन चाहे वह 2014, 2017 और 2019 हो, देश के राजनीतिक विश्लेषकों को मानना होगा कि अर्थमैटिक के आगे भी केमिस्ट्री होती है.

– देश में समाज शक्ति की जो कैमिस्ट्री है. आदर्शों, संकल्पों की जो कैमिस्ट्री है वो कभी-कभी सारे गुणा-भाग को, अंक गणित को
पराजित कर देती है. इस चुनाव में अंक गणित को कैमिस्ट्री ने पराजित किया है.

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– पारदर्शिता और परिश्रम दो ऐसी चीजें हैं, हर परसेप्शन को परास्त करने का साहस रखते हैं. आज हिंदुस्तान ने ये कर के दिखाया है. पारदर्शिता और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है.

– सरकार का काम है कार्य करना और इसलिए एक तरफ सरकार का कार्य हो और उसमें जब कार्यकर्ता जुड़ जाता है तो
‘कार्य+कार्यकर्ता’ वो एक ऐसी ताकत है जो करिश्मा करती है.

– जैसे दो शक्ति हैं नीति और रीति, जैसे दो शक्ति हैं नीति और रणनीति, जैसे दो शक्ति हैं पारदर्शिता और परिश्रम, जैसे दो शक्ति हैं
वर्क एंड वर्कर, वैसे ही दो संकट भी हमने झेले हैं और वो दो संकट हैं – राजनीतिक हिंसा और राजनीतिक अस्पृश्यता

– कई राज्यों में हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं की राजनीतिक विचारधारा के कारण हत्याएं हुई है. हमारे देश में राजनीतिक छुआछूत दिनों दिन बढ़ती जा रही है. कई जगह भाजपा का नाम लेते है ही अस्पृश्यता का माहौल बनाया जाता है.

– आज देश के राजनीतिक कैनवास पर ईमानदारी से रग-रग में लोकतंत्र को जीने वाला कोई दल है, तो वो भाजपा है. हम शासन में
आते है तब भी लोकतंत्र की सबसे ज्यादा परवाह करते हैं.

– हम लोकत्रंत में विश्वास रखने वाले लोग हैं. जहां-जहां हमें मौका मिला है, वहां विपक्ष की आवाज को महत्व दिया है, जनता के
अविश्वास के कारण उनकी संख्या चाहे कम ही क्यों न हो.

– हम दो बातों को लेकर चलने का प्रयास करते हैं – पहला – भारत की महान विरासत, दूसरा – आधुनिक विजन. हमें हमारे कल्चर
को भी बरकरार रखना है और वर्तमान स्थिति का भी ध्यान रखना है.

– आज देश के राजनीतिक कैनवास पर ईमानदारी से रग-रग में लोकतंत्र को जीने वाला कोई दल है, तो वो भाजपा है. हम शासन में
आते है तब भी लोकतंत्र की सबसे ज्यादा परवाह करते हैं.

– हम लोकत्रंत में विश्वास रखने वाले लोग हैं. जहां-जहां हमें मौका मिला है, वहां विपक्ष की आवाज को महत्व दिया है, जनता के
अविश्वास के कारण उनकी संख्या चाहे कम ही क्यों न हो.

– शायद ही कोई उम्मीदवार चुनाव में और नतीजों के समय इतना निश्चिंत होता होगा जितना मैं था. इस निश्चिंतता का कारण मोदी नहीं था, इसका कारण आप सब का परिश्रम और विश्वास था. नतीजे और मतदान दोनों समय मैं निश्चिंत था, इसलिए केदारनाथ में बाबा के चरणों में बैठ गया था.

– पारदर्शिता और परिश्रम दो ऐसी चीजें हैं, जो हर परसेप्शन को परास्त करने का साहस रखती हैं. आज हिंदुस्तान ने ये कर के
दिखाया है. पारदर्शिता और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है. क्योंकि हमें नकारात्मकता के बीच सकारात्मकता को लाना है.