नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 की 25 सीटों पर मुंह की खाने के बाद राज्य कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है. राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने खुलकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ ‘बगावत’ कर दी है. मंत्रियों ने कहा कि अशोक गहलोत अपने बेटे को जोधपुर से जितवाने के लिए वहां कई दिनों तक डटे रहे. इस कारण राज्य की अन्य सीटों पर पार्टी ने फोकस नहीं किया. जोधपुर में भी गहलोत के बेटे हार गए. इसके बाद अशोक गहलोत ने संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व चाहे तो राज्य में नेतृत्व बदल सकता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति ने राहुल गांधी जी को अधिकृत किया है कि वह पार्टी के हित में फैसले करें. चाहे वह संगठन में सभी स्तर पर बदलाव हो या फिर पार्टी शासित राज्यों की सरकारों में बदलाव हो. उन्हें अधिकृत किया गया है कि वह पार्टी और देश के हित में फैसले करें. मैं आशा करता हूं कि फैसला जल्द किया जाएगा. Also Read - Maharashtra में दशहरा से खुलेंगे Gyms और Fitness Centres, लेकिन इन गतिविधियों पर रहेगा प्रतिबंध

राहुल ने नाम लेकर बोला था
सूत्रों के मुताबिक गांधी ने 25 मई को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं ने पार्टी से ज्यादा अपने बेटों को महत्व दिया और उन्हीं को जिताने में लगे रहे. दरअसल, गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत चुनाव लड़े थे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. खबरों के मुताबिक गहलोत जोधपुर में अपने पुत्र के पक्ष में प्रचार के लिए कई दिनों तक डंटे रहे. राज्य की सभी 25 सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. Also Read - 'मिशन शक्ति' शुरू, CM योगी बोले- बेटियों पर बुरी नजर डालने वालों के लिए UP में कोई जगह नहीं

इस बारे में राहुल गांधी के बयान के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संगठन या पार्टी शासित राज्यों की सरकारों में बदलाव के लिए कांग्रेस अध्यक्ष कोई भी फैसला करने के लिए अधिकृत हैं. Also Read - Kerala Gold smuggling case: बीजेपी ने मांगा मुख्यमंत्री पिनरई विजयन का इस्तीफा

जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग
दरअसल, राजस्थान सरकार के कई मंत्रियों ने चुनाव में जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग की है. राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सीडब्ल्यूसी ने संगठन में बदलाव के लिए राहुल गांधी को अधिकृत किया है और वह बदलाव करेंगे. कुछ नेताओं द्वारा पार्टी से ज्यादा अपने बेटों को महत्व दिए जाने पर गांधी की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर खाचरियावास ने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है. उनसे ऊपर कोई नहीं है और उन्होंने पूरा सोच-समझकर यह कहा होगा. कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता उनके शब्दों का सम्मान करते हैं. मुझे भी इस बारे में मीडिया के जरिए पता चला है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर राहुल गांधी जी वरिष्ठ नेताओं की कमी पाते हैं तो उनका पूरा अधिकार है कि वह जवाबदेही तय करें और कार्रवाई करें.’’

मंत्रियों ने उठाए सवाल
राजस्थान सरकार के एक और मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने भी कहा कि पार्टी की हार के लिए तत्काल जवाबदेही तय होनी चाहिए. इससे पहले राजस्थान के सहकारिता मंत्री उदयलाल अंजना और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि पार्टी को हार का विस्तृत आकलन करके राज्य में होने वाले स्थानीय निकायों के चुनाव के लिये पार्टी को फिर से मजबूती के साथ तैयार करना चाहिए. अंजना ने कहा कि लोकसभा चुनावों के परिणाम आशाओं के विपरीत थे. भाजपा द्वारा उठाए गए राष्ट्रवाद के मुद्दे से मतदाताओं को प्रभावित किया गया था. हमारे नेताओं ने भी पूरे प्रयास किए लेकिन यह लोगों को स्वीकार्य नहीं था.

उधर, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के त्यागपत्र देने पर कुछ भी साफ नहीं हो पाया है. रविवार को एक कथित प्रेस विज्ञप्ति में कटारिया ने कहा कि वह राज्य के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के खराब प्रदर्शन के मद्देनजर मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रहे है. रविवार से आज तक कटारिया से संपर्क नहीं किया जा सका है. मुख्यमंत्री कार्यालय और राजभवन से त्यागपत्र के बारे में किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हो सकी है.

(इनपुट-भाषा)