नई दिल्ली. मध्यप्रदेश में आगामी 12 मई को भोपाल समेत कई संसदीय सीटों पर लोकसभा चुनाव के तहत छठे चरण का मतदान होना है. इसको देखते हुए सियासी गर्माहट और बढ़ गई है. खासकर, प्रदेश की राजधानी भोपाल में, जहां कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) चुनाव लड़ रही हैं. दोनों ही दलों के उम्मीदवार अपने-अपने समर्थन में मतदाताओं से वोट मांग रहे हैं. इस क्रम में मंगलवार को अनोखा नजारा देखने को मिला, जब कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह को साधु-संतों के एक समूह ने समर्थन देने की घोषणा की. भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले कंप्यूटर बाबा के नेतृत्व में जुटे इन साधु-संतों ने एक सुर में कांग्रेस को समर्थन दिया और नारा लगाया कि ‘राम मंदिर नहीं तो मोदी नहीं’.

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ऐसे समय में जबकि भोपाल लोकसभा सीट पर भाजपा ने हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसी साध्वी को अपना उम्मीदवार बनाया है, कंप्यूटर बाबा और हजारों अन्य साधु-संतों का कांग्रेस को समर्थन देना प्रदेश की सियासत में नया हलचल पैदा करने वाला है. कंप्यूटर बाबा ने मंगलवार को दिग्विजय सिंह के लिए पूजा की और हवन कराया. उन्होंने साफ तौर पर भाजपा पर आरोप लगाया कि वह 5 वर्षों में राम मंदिर नहीं बनवा पाई, इसलिए साधु-संत मोदी को अपना समर्थन नहीं देंगे. कंप्यूटर बाबा ने कहा, ‘भाजपा सरकार 5 साल में राम मंदिर नहीं बनवा पाई. अब राम मंदिर नहीं तो मोदी नहीं.’

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कंप्यूटर बाबा ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के पक्ष में खुलकर समर्थन देने की बात की. कंप्यूटर बाबा के नाम से पहचाने जाने वाले नामदेव दास त्यागी की अगुवाई में हजारों की संख्या में साधु-संत मंगलवार को भोपाल पहुंचे. यहां इन साधु-संतों ने दिग्विजय सिंह के लिए पूजा कराई. इस दौरान साधु-संतों ने हठ योग का प्रदर्शन किया और दिग्विजय के पक्ष में खुलकर बोले. साधु-संतों ने भोपाल के मतदाताओं से अपील की कि वे इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के पक्ष में मतदान करें.

आपको बता दें कि कंप्यूटर बाबा, पिछले साल इसी समय तब चर्चा में आए थे जब सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने कंप्यूटर बाबा समेत 5 साधुओं को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था. हालांकि मंत्री पद का दर्जा मिलने के कुछ ही महीनों के बाद कंप्यूटर बाबा ने इस पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वे शिवराज सरकार के खिलाफ हो गए. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कंप्यूटर बाबा ने शिवराज सरकार को धर्म-विरोधी करार देते हुए साधु समाज से अपील की थी कि वह इस सरकार को उखाड़ फेंके.