कोच्चि. लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं का अपनी-अपनी पार्टियों से ‘मोहभंग’ होने लगा है. कांग्रेस को वर्षों तक ‘खून-पसीना’ देने वाले भाजपाई हुए जा रहे हैं, तो भाजपा में ‘घुटन’ महसूस कर रहे नेता कांग्रेस पार्टी का दामन थाम रहे हैं. किसी नेता को ‘पार्टी के स्टैंड’ से दिक्कत है, तो कोई पार्टी में ‘व्यक्तिवाद’ से परेशान है. यही वजह है कि पिछले एक सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों के नेता अपनी पार्टियां बदलकर दूसरे दल में मिल जा रहे हैं.

ताजा मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर से जुड़ा है. थरूर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. यूपीए सरकार में मंत्री रहे हैं. लेकिन थरूर के करीबी रिश्तेदारों ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अपनी ‘रिश्तेदारी’ को धता बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली है. जी हां, केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर की मौसी और उनके मौसा ने शुक्रवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. केरल के एक शीर्ष कांग्रेसी नेता भी गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए थे. इधर, गुजरात में भाजपा की प्रवक्ता और पाटीदार आंदोलन का चेहरा रहीं रेशमा पटेल ने ऐन चुनाव के मौके पर अपनी पार्टी को झटका दिया है. पटेल ने शुक्रवार को भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. पाटीदार आंदोलन के बाद भाजपा में आईं पटेल को पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया था.

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कांग्रेस प्रवक्ता टॉम वडक्कन के भाजपा में शामिल होने के एक दिन बाद तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य शशि थरूर के मौसा-मौसी ने शुक्रवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. थरूर की मां की बहन, सोभना शशिकुमार और उनके पति शशिकुमार तथा 13 अन्य लोग भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा के राज्य अध्यक्ष पी.एस. श्रीधरन पिल्लै ने सभी का पार्टी में स्वागत किया. थरूर के मौसा-मौसी ने कहा कि एक लंबे समय से वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा का अनुसरण कर रहे हैं.

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इधर, गुजरात में करीब ढाई वर्षों तक भाजपा के साथ रहीं और पाटीदार आंदोलन के दौरान महिला चेहरा मानी गईं रेशमा पटेल ने ऐन चुनाव के मौके पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतू वघानी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. हार्दिक पटेल की अगुवाई में पाटीदार आंदोलन की एक मुख्य सदस्य रहीं रेशमा पटेल ने बाद के दिनों में भाजपा की सदस्यता ले ली थी. पार्टी अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा, “भाजपा अब केवल एक मार्केटिंग कंपनी बन गई है और हमें सरकार की फर्जी नीतियों और फर्जी योजनाओं की मार्केटिंग करने और लोगों को मूर्ख बनाने के लिए कहा जा रहा है.” उन्होंने कहा, “मैं लगातार दुख और अन्याय होते देखना नहीं चाहती और इसलिए मैंने खुद को इस तरह के तानाशाह नेताओं अन्यायपूर्ण साझेदारी से मुक्त कर लिया और जनहित में पार्टी से इस्तीफा दे रही हूं.”

(इनपुट – एजेंसी)