नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश में सियासी चालें लगातार बदल रही हैं. गठबंधन में नहीं रहने के बाद भी दो सीटें (अमेठी व रायबरेली) छोड़े जाने के बदले सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के लिए कांग्रेस ने सात सीटें छोड़ दी हैं. कांग्रेस ने मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती, डिम्पल यादव, अक्षय यादव की सीट सहित वो सात सीटें छोड़ी हैं, जहां से गठबंधन के बेहद ख़ास उम्मीदवार उतरेंगे. इन सात में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की दो सीटें भी शामिल हैं. रालोद के बागपत और मुज़फ्फरनगर में खड़े होने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ कांग्रेस अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी.

सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के लिए सात सीटें छोड़ने के साथ ही कांग्रेस ने कृष्णा पटेल के नेतृत्व वाली पार्टी अपना दल के लिए भी दो सीटें छोड़ी हैं. अपना दल के खाते में गोंडा व पीलीभीत की सीटें गई हैं. कांग्रेस ने जन अधिकार पार्टी (जेएपी) के साथ भी मिल-जुलकर लड़ने का फैसला किया है. दोनों पार्टियां कुल सात सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगीं. गठबंधन के लिए सात, जन अधिकार पार्टी के लिए पांच व अपना दल के लिए दो सीटों को मिलाकर कुल 14 सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी.

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यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने बताया कि कांग्रेस मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव, रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव के साथ रालोद के लिए दो सीटें छोड़ दी हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने जन अधिकार पार्टी (जेएपी) के साथ मिल-जुलकर लड़ने का फैसला किया है. दोनों पार्टियां कुल सात सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगीं. पांच सीटों पर जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी होंगे जबकि दो सीटों पर जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ेंगे. जन अधिकार पार्टी के संस्थापक बाबू सिंह कुशवाहा हैं. बसपा सरकार के समय वह मंत्री थे और मायावती के करीबी माने जाते थे.


राजबब्बर के अनुसार महान दल से भी बातचीत चल रही है. महान दल को हम जो भी सीट हम देंगे, वो उसके लिए तैयार है. महान दल विधानसभा चुनाव में भी हमारे साथ आने को तैयार था. लोकसभा चुनाव के लिए महान दल हमारे सिंबल पर प्रत्याशी उतारने को तैयार है. बता दें कि प्रियंका गांधी आज ही उत्तर प्रदेश पहुंची हैं. सात सीटों पर प्रत्याशी नहीं उतारने की रणनीति के पीछे प्रियंका गांधी को माना जा रहा है.