मुंबई/ नई दिल्‍ली: बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित फिल्म की रिलीज पर रोक से सोमवार को इनकार कर दिया. इस फिल्म में केंद्रीय भूमिका अभिनेता विवेक ओबेरॉय की है. मुख्य न्यायाधीश नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति एनएम जमदार ने पाया कि निर्वाचन आयोग पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी कर चुका है. इस फिल्म के निर्माताओं पर आरोप है कि उन्होंने लोकसभा चुनावों को देखते हुए आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है. वहीं, दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित एक फिल्म की रिलीज पर चुनाव परिणाम आने तक स्थगनादेश देने की मांग करने वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया. Also Read - Bombay High Court Recruitment 2021: बॉम्बे हाई कोर्ट में इन विभिन्न पदों पर निकली वैकेंसी, जल्द करें आवेदन, 46 हजार मिलेगी सैलरी

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने इस सार्वजनिक हित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे और इसके लिए याचिकाकर्ताओं को सेंसर बोर्ड या फिर निर्वाचन आयोग जाना चाहिए. Also Read - ऑक्सीजन कालाबाजारी मामले में नवनीत कालरा को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने ठुकराई अग्रिम जमानत अपील

अदालत ने कहा, निर्वाचन आयोग पहले से इसे संज्ञान में ले चुका है और वह उससे निपटेगा. यह जनहित याचिका सतीश गायकवाड़ ने दायर की थी. गायकवाड़ रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आई) के अध्यक्ष है. याचिका में फिल्म की रिलीज पर प्रश्न करते हुये कहा गया था कि अगर इसके प्रदर्शन को अनुमति मिलती है तो इससे प्रधानमंत्री को चुनावी फायदा मिल सकता है. चुनाव आयोग, हालांकि अदालत से कह चुका है कि उसने फिल्म निर्माताओं से जवाब मांगा है. Also Read - HC ने दिल्‍ली सरकार से पूछा, क्या AAP MLA इमरान हुसैन को ‘रिफिलर’के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई?

इस याचिका में दिल्‍ली हाईकोर्ट से भारत निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह फिल्म बनाने वालों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन करने पर कार्रवाई करे. याचिकाकर्ता ने अदालत से इसके निर्माताओं को भी यह निर्देश देने को कहा था कि लोकसभा चुनाव परिणाम आने तक इसके प्रदर्शन को टाल दिया जाए. यह फिल्म पांच अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज की जाएगी. याचिका में कहा गया था कि चुनावों के दौरान यह फिल्म प्रदर्शित करना कुछ और नहीं अपितु चुनावी प्रचार की रणनीति है और इससे मतदान प्रभावित हो सकता है.