नई दिल्ली. राफेल फाइटर विमान का मुद्दा पिछले साल 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान सबसे ‘हॉट’ मुद्दा रहा था. लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी के नेता इस विमान के लिए हुई डील को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के खिलाफ रैलियों और सभाओं में नारे बुलंद कर रहे हैं. लेकिन मंगलवार को राफेल डील की चर्चा किसी पार्टी या सरकार को लेकर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा की गई एक कार्रवाई को लेकर हुई. जी हां, तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के एक प्रकाशक ने राफेल डील को लेकर किताब छापी. यह किताब जब तक बाजार में आती, उसके पहले ही चुनाव आयोग ने आचार संहिता का हवाला देते हुए इसकी प्रतियां जब्त कर लीं. हालांकि बाद में राज्य के मुख्य निर्वाची अधिकारी सत्यव्रत साहू ने साफ किया कि न तो आयोग और न ही उन्होंने किताब की बिक्री रोकने से संबंधित कोई निर्देश नहीं दिया है.

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एस. विजयन द्वारा लिखी गई किताब ‘नेट्टाई उलुक्कुम राफेलः बेरा ऊझल’ (Nattai Ulukkum Rafael; Bera Oozhal/Rafael: laundering of the nation) यानी ‘राफेलः राष्ट्र की सराहना’ के प्रकाशक का आरोप है कि चुनाव आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड ने किताब की प्रतियों की बिक्री रोक दी है. भारती पब्लिकेशन चलाने वाले प्रकाशक पी.के. राजन का कहना है, ‘हमने इसके पहले भी चुनावों पर आधारित कई किताबें प्रकाशित की हैं. राफेल को लेकर प्रकाशित किताब में ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जो सार्वजनिक नहीं है. बावजूद इसके निर्वाचन आयोग ने इसकी बिक्री रोक दी है.’ राजन ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, ‘यह समझ से परे है कि आखिर निर्वाचन आयोग और सरकार को इस किताब में ऐसी क्या गड़बड़ी नजर आई, जिसके कारण अचानक इसकी बिक्री पर रोक लगाई जा रही है. हमें अपनी दुकान तक पर इस किताब को बेचने से रोक दिया गया है.’

पीके राजन ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में कहा कि उन्हें बताया गया है कि इस किताब को छापने से पहले अनुमति नहीं ली गई, इसलिए हम इसकी बिक्री नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, ‘निर्वाचन आयोग का फ्लाइंग स्क्वॉड मंगलवार की सुबह अचानक उनकी दुकान पर पहुंचा और उनसे कहा कि इस किताब को नहीं बेच सकते. चूंकि यह किताब राजनैतिक विषय से संबंधित है, इसलिए इसकी बिक्री नहीं की जा सकती.’ राजन ने कहा कि यह हैरान कर देने वाली बात है कि जिस शहर में हर दूसरे दिन एक किताब का प्रकाशन होता हो, वहां किसी पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगा दी जाए.

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अखबार के साथ बातचीत में राजन ने कहा कि विजयन की लिखी किताब को उन्होंने सामान्य पाठकों को ध्यान में रखते हुए काफी सरल भाषा में प्रकाशित किया है. उन्होंने कहा, ‘राफेल डील को लेकर जो बातें सार्वजनिक हैं, वही बातें किताब में छापी गई हैं. लेकिन मुझे लगता है कि चूंकि किताब की सरल भाषा के कारण अब यह सामग्री सामान्य पाठकों तक पहुंच जाती, इसलिए इसकी बिक्री में बाधा पहुंचाई जा रही है.’ हालांकि देर शाम राज्य के मुख्य निर्वाची अधिकारी सत्यव्रत साहू ने किताब का प्रकाशन रोकने को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग या उन्होंने इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया है. फिर भी यदि यह घटना हुई है तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों को मामले को देखने के लिए कहा गया है.

बहरहाल, तमिलनाडु राज्य निर्वाचन आयोग के उच्च अधिकारी की सफाई के बाद आखिरकार राफेल डील से संबंधित इस किताब के विमोचन का रास्ता साफ हो गया. प्रकाशक पीके राजन ने अखबार को बताया कि हमने सुना है कि निर्वाचन आयोग ने विज्ञप्ति जारी की है कि इस किताब के प्रकाशन या बिक्री पर किसी तरह की रोक नहीं है. इसलिए अब हमारी यह किताब आम लोगों तक आसानी से पहुंचेगी.

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