भोपाल. लोकसभा चुनाव के बाद विभिन्न समाचार चैनलों के एग्जिट पोल के अनुमानों से एक तरफ जहां भाजपा समर्थित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सदस्य दल खुश हैं, वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर संकट मंडराता नजर आ रहा है. खासकर मध्यप्रदेश में, जहां पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस 15 वर्षों के बाद सत्ता में आई है, भाजपा ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण की बात उठाकर कमलनाथ सरकार को ‘संकट’ में डाल दिया है. एग्जिट पोल व सर्वे में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने के आसार के बीच मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा का सत्र बुलाए जाने की मांग की है.

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विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भार्गव ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एग्जिट पोल के अनुसार एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को दो से तीन सीटें मिलने वाली हैं, यह इस बात का संकेत है कि वर्तमान सरकार ने जनता का भरोसा खो दिया है. इसलिए उनकी मांग है कि राज्य विधानसभा का सत्र बुलाया जाए. इसके लिए वे राज्यपाल को पत्र लिखने वाले हैं.

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भार्गव ने आगे कहा, “विधानसभा सत्र में सत्ताधारी दल की शक्ति का भी परीक्षण हो जाएगा. कांग्रेस के पास दूसरों के सहयोग से बहुमत है, भाजपा चाहती तो वह भी जोड़-तोड़ करके सरकार बना सकती थी, मगर भाजपा ने ऐसा नहीं किया.” ज्ञात हो कि, राज्य की विधानसभा में 230 विधायक हैं, जिसमें कांग्रेस के 114 और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 109 विधायक है. कांग्रेस सरकार बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही है. लोकसभा चुनाव को लेकर समाचार माध्यमों के सर्वे में राज्य की 29 सीटों में से कांग्रेस को अधिकतम पांच सीटें मिलने की बात कही गई है.

(इनपुट – एजेंसी)

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