भोपाल: भोपाल लोकसभा सीट की भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा शहीद आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे पर दिए गए विवादित बयान से व्यथित होकर महाराष्ट्र के पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त रियाजुद्दीन देशमुख (60) उनके खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए हैं. रियाजुद्दीन ने 23 अप्रैल को भोपाल सीट से अपना नामांकन-पत्र दाखिल किया है. कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह भी इस सीट पर चुनावी मैदान में हैं.

करकरे 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए थे और वह रियाजुद्दीन के वरिष्ठ अधिकारी थे. 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए बम धमाकों के मामले में प्रज्ञा आरोपी हैं और तकरीबन 9 साल जेल में रहीं हैं. इस बहुचर्चित मामले में वह इन दिनों जमानत पर हैं.

बीते 18 अप्रैल को भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में मुंबई एटीएस के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे पर जेल में यातना देने का आरोप लगाते हुए प्रज्ञा ने कहा था कि मैंने करकरे को सर्वनाश होने का श्राप दिया था और इसके सवा माह बाद आतंकवादियों ने उन्हें मार दिया. हालांकि, इस बयान के एक दिन बाद चारों तरफ से आलोचना होने के बाद प्रज्ञा ने अपना बयान वापस ले लिया था और माफी मांग ली थी.

महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित नेहरू नगर के रहने वाले रियाजुद्दीन ने गुरुवार को फोन पर बताया, ”अपने वरिष्ठ अधिकारी करकरे के खिलाफ प्रज्ञा द्वारा की गई टिप्पणी से मैं अत्यधिक व्यथित हूं.” उन्होंने कहा, ”कुछ ही पलों बाद उसने शहीद हुए करकरे साहब को देशद्रोही कहा. मैंने फैसला किया है कि मैं प्रज्ञा के खिलाफ चुनाव लडूंगा.”

साल 2016 में सहायक पुलिस आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए रियाजुद्दीन ने कहा, मैंने करकरे के अधीन सब इंस्पेक्टर के रूप में काम किया था. उस समय वह (करकरे) अकोला जिले के पुलिस अधीक्षक थे. वह मेरे बॉस थे. वह बहादुर, लोगों की सहायता करने वाले एवं लोगों को प्रेरित करने वाले एक रत्न थे.

पूर्व एसीपी ने कहा, वह मुझे बहुत पसंद करते थे. मैं उन्हें अत्यधिक सम्मान देता था. रियाजुद्दीन ने बताया, मैंने भोपाल सीट से 23 अप्रैल को अपना नामांकन-पत्र दाखिल कर दिया है और किसी भी हालत में मैं अपना नामांकन वापस नहीं लूंगा. भोपाल सीट से नामांकन-पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 26 अप्रैल है. 12 मई को इस सीट पर मतदान होना है.