नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ वाराणसी लोकसभा सीट (Varanasi Lok Sabha Seat) से कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के चुनाव लड़ने के कयासों पर गुरुवार को विराम लग गया. कांग्रेस पार्टी ने वाराणसी से अजय राय (Ajay Rai) के रूप में अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन ने भी अपना उम्मीदवार यहां से उतार दिया है. इसके बाद वाराणसी संसदीय सीट की लड़ाई पीएम मोदी बनाम अजय राय की मान ली गई है. मगर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके की इस सबसे महत्वपूर्ण सीट के चुनावी जंग में कुछ और उम्मीदवार भी हैं, जिन पर हमारी-आपकी नजर जानी चाहिए.

ये उम्मीदवार लोकतंत्र के इस पर्व में पीएम मोदी के खिलाफ लड़ाई लड़ने उतरे हैं. इनमें सबसे पहला नाम तो सीमा सुरक्षा बल (BSF) के पूर्व जवान तेजबहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) का है, जो बीएसएफ में खराब खाने का वीडियो वायरल कर चर्चा में आए थे. वाराणसी संसदीय सीट से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए किसानों का एक समूह भी मैदान में उतरा है. तेलंगाना के निजामाबाद इलाके के 50 किसानों का यह समूह मूलतः हल्दी उगाने वाले वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है. लोकतंत्र के चुनावी उत्सव में भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जैसे सशक्त नेता के खिलाफ चुनावी जंग में कमर कसकर खड़े होने वाले इन उम्मीदवारों की जीत या हार से ज्यादा, इनके जज्बे की चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं इन उम्मीदवारों के बारे में कि पीएम मोदी के खिलाफ कैसी-कैसी रणनीति बनाकर ये चुनाव लड़ने वाले हैं.

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पीएम के खिलाफ उतरे 100 से ज्यादा पुराने चौकीदार
लोकसभा चुनाव के दौरान ‘चौकीदार’ शब्द पर काफी राजनीति हुई है. कांग्रेस जहां इस शब्द को लेकर भाजपा पर आरोप लगा रही थी, वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष के ऊपर ‘बूमरैंग’ की तरह ही इस्तेमाल किया है. मगर इससे इतर वाराणसी में देश की सेवा करने वाला सेना का एक जवान चुनाव लड़ने उतरा है. बीएसएफ के पूर्व जवान तेजबहादुर यादव भी इस लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के खिलाफ अपनी किस्मत आजमाने उतरे हैं. वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ने वाले तेजबहादुर की मुहिम में उनका साथ देने के लिए 100 से ज्यादा जवान या पूर्व सैनिक भी आए हैं. इन जवानों में कोई रिटायर्ड सीआरपीएफ कर्मी है तो कोई आईटीबीपी का सेवानिवृत्त कर्मचारी. वहीं कई ऐसे जवान भी शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न कारणों से सुरक्षाबलों से निलंबन झेलना पड़ा है.

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अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ के साथ बातचीत में इन जवानों ने बताया कि उनकी लड़ाई भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ है. इन पूर्व सैनिकों का आरोप है कि पीएम मोदी की सरकार ने सेना या सुरक्षाबलों के लिए किए गए वादे पूरे नहीं किए, लेकिन चुनाव के समय इनके नाम पर वोट मांगा जा रहा है. सर्जिकल स्ट्राइक जैसे विषयों को चुनाव में मुद्दा बनाने को लेकर भी इन जवानों ने अपनी नाराजगी जाहिर की. तेजबहादुर यादव की अगुवाई में इन सेवानिवृत्त सुरक्षाकर्मियों के दल ने वाराणसी के मंडुआडीह इलाके में अपना चुनाव दफ्तर बना रखा है. इस समूह में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए ओमप्रकाश सिंह ने अखबार से बातचीत में कहा कि 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक से पहले ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनका मैं भी हिस्सा रहा हूं. लेकिन कभी भी सेना के इन गुप्त मिशनों का इस तरह सियासी इस्तेमाल नहीं किया गया.

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सीआरपीएफ से निलंबित 32 वर्षीय पंकज मिश्रा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि एक सैनिक को देश की सेवा के लिए भेजा जाता है, लेकिन उसे अधिकारियों के घरों में या दफ्तरों में काम पर लगा दिया जाता है. इसके खिलाफ आवाज उठती है, तो उसे दबाया जाता है, लेकिन सरकार देखती तक नहीं. मिश्रा ने कहा कि सुरक्षाबल कर्मियों के 4 हजार से ज्यादा ऐसे आवेदन प्रधानमंत्री कार्यालय के पास पहुंचे हैं, जिनमें शिकायत की गई है कि इन कर्मियों से आला अफसरों के घर में काम लिया जाता है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. पीएम मोदी ऐसी शिकायतों पर ध्यान तक नहीं देते. उन्होंने कहा कि हमें अफसरों और उनकी पत्नी-बच्चों के कपड़े धोने के लिए मजबूर किया जाता है. उनका घर या टॉयलेट साफ करने के लिए कहा जाता है, लेकिन हमारी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है.

आईटीबीपी से रिटायर 54 वर्षीय तान सिंह ने टेलीग्राफ से बातचीत में कहा कि आज हम भले ही संख्या में कम हों, राजनीतिक रूप से हमारी क्षमता शून्य हो, लेकिन पीएम मोदी के खिलाफ जंग हम मजबूती के साथ लड़ेंगे. एक दिन हमारी आवाज जरूर सुनी जाएगी. तान सिंह ने आईटीबीपी से रिटायरमेंट के बाद जागरूकता मिशन शुरू किया है. इसके तहत वह सुरक्षाबल में कार्यरत कर्मियों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे हैं. उनका कहना था कि आज एक सैनिक मोदी के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है, कल इसकी संख्या बढ़ेगी. एक दिन ऐसा भी आएगा जब हम मोदी को हराकर दिखाएंगे.

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इधर, हल्दी की कीमत और हल्दी बोर्ड के लिए लड़ाई
तेलंगाना में निजामाबाद के करीब 50 किसान अपनी समस्याओं को उजागर करने के प्रयास के तहत वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन दायर करने आए हैं. किसानों की योजना हल्दी की लाभकारी कीमत और एक हल्दी बोर्ड के गठन की मांग पर दबाव बनाने के लिए निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की है. किसानों के समूह के एक नेता गंगा रेड्डी ने बताया कि समूह में 52 लोग हैं तथा और भी अधिक लोग वाराणसी पहुंचेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘हम एक हल्दी बोर्ड चाहते हैं. हम केन्द्र और सभी राजनीतिक पार्टियों को इसके लिए जागरूक करने के लिए नामांकन दायर करने जा रहे हैं.’’ उन्होंने बताया कि विचार यह है कि उनके नामांकन से बहस को एक गति मिलेगी, जिससे हल्दीबोर्ड के गठन को बढ़ावा मिलेगा. रेड्डी ने आरोप लगाया कि केन्द्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार एक हल्दी बोर्ड का गठन करने में विफल रही है. रेड्डी ने यह भी जोड़ा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए नहीं हैं. आपको बता दें कि वाराणसी में अंतिम चरण में 19 मई को चुनाव होना है.

(इनपुट – एजेंसी)

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