मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत और गाजियाबाद में उम्मीदवार न बदलने से भाजपा कार्यकर्ता यदि नाराज हैं तो कैराना में उनकी नाराजगी उपचुनाव में उम्मीदवार रहीं मृगांका सिंह को टिकट न दिए जाने से है. मृगांका इस इलाके में प्रभावशाली गूर्जर नेता और पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी हैं. हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने कैराना से मृगांका को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार तबस्सुम हसन से चुनाव हार गईं. इसके पहले वह कैराना से ही विधानसभा का चुनाव भी हार चुकी थीं. बावजूद इसके मृगांका को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें इस बार फिर मौका देगी. भाजपा ने मृगांका के बजाय गूजर समुदाय से ही दूसरे नेता प्रदीप चौधरी को यहां से टिकट दिया है.

भाजपा के स्थानीय नेता मानते हैं कि मृगांका के प्रति समुदाय की सहानुभूति है और उन्हें टिकट न दिए जाने से एक बड़ा तबका नाराज है. इस नाराजगी से संभावित नुकसान की भरपाई के लिए ही भाजपा ने इलाके के एक और गूजर नेता व समाजवादी पार्टी से विधानपरिषद के सदस्य वीरेंद्र सिंह को पार्टी में शामिल किया है.

भाजपा के स्थानीय रणनीतिकारों का आकलन है कि सांसदों के प्रति नाराजगी से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. पिछले चुनाव में अगर सहारनपुर को छोड़ दें तो कहीं भी भाजपा की जीत का अंतर दो लाख वोट से कम नहीं था. सहारनपुर में भाजपा उम्मीदवार को लगभग 65 हजार वोट ज्यादा मिले थे. कांग्रेस वहां दूसरे नंबर पर थी. रणनीतिकार मान रहे हैं कि जीत का अंतर हो सकता है कि कम हो, पर मोदी के नाम पर अब भी भाजपा जीतने की स्थिति में है.

हाल ही में चर्चा में आए भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद “रावण” के गांव छुटमलपुर में उनके पड़ोसी जॉनी ने कहा, इस बार भाजपा उम्मीदवार तभी जीत सकते हैं जब मुस्लिम मतों में बंटवारा हो. मुजफ्फरनगर, बागपत, गाजियाबाद और कैराना में इसकी संभावना नहीं है. सहारनपुर और बिजनौर में इसका सबसे ज्यादा खतरा है. जॉनी का मानना था कि दलित वर्ग का एक बड़ा तबका मोदी का समर्थक है लेकिन अधिकांश का वोट मायावती को ही मिलेगा.