बेंगलुरू. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार को पहले से निर्धारित दिल्ली का अपना दौरा रद्द कर दिया है. कुमारस्वामी को मंगलवार को दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक में हिस्सा लेना था. लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी कि उनका दौरा रद्द कर दिया गया है. लोकसभा चुनाव को लेकर आए अधिकतर एग्जिट पोल में केंद्र में राजग सरकार के दोबारा लौटने के अनुमान के बाद बने सियासी हालात और कर्नाटक में सत्ताधारी गठबंधन के बीच जारी रस्साकशी को देखते हुए कुमारस्वामी के दिल्ली न आने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. सियासी जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि यह कर्नाटक में कांग्रेस-JDS गठबंधन के टूटने का संकेत है. अगर कुमारस्वामी इन्हीं वजहों से दिल्ली नहीं आए हैं, तो इसे एग्जिट पोल के बाद कांग्रेस पार्टी के ऊपर गहरी चोट समझा जा रहा है. यह गौरतलब है कि कर्नाटक से पहले मध्यप्रदेश में भी भाजपा ने कमलनाथ सरकार के ऊपर से जनता का भरोसा टूटने का आरोप लगाते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.

कर्नाटक में मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बिना कारण बताए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री का दिल्ली का प्रस्तावित दौरा आज रद्द हो गया है.’’ इससे पहले मीडिया को जारी किए गए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार कुमारस्वामी को विशेष विमान से 11 बजे दिल्ली के लिए रवाना होना था और आज शाम को वापस आने से पहले उन्हें विपक्षी दलों की बैठक में हिस्सा लेना था. JDS सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री को दिल्ली में ईवीएम के मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक में शिरकत करना था. विपक्षी दलों की इस बैठक में 23 मई को होने वाली मतगणना से पहले निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर ईवीएम और वीवीपैट मशीन के आंकड़ों का मिलान कराने की मांग करने पर विचार होना है. लेकिन कुमारस्वामी के अचानक बैठक में न आने के फैसले से देश के दक्षिणी इलाके में कांग्रेस के एक और किले के ढहने के संकेत मिलने लगे हैं.

एग्जिट पोल का असरः कांग्रेस नेता ने दिए पार्टी छोड़ने के संकेत, कहा- मुसलमान भी भाजपा से मिलाएं हाथ

एग्जिट पोल का असरः कांग्रेस नेता ने दिए पार्टी छोड़ने के संकेत, कहा- मुसलमान भी भाजपा से मिलाएं हाथ

दरअसल, कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की पार्टी JDS और कांग्रेस के बीच फंसे इस पेंच के पीछे लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों का प्रदर्शन है. राज्य में लोकसभा की कुल 28 सीटें हैं. इन सभी सीटों पर गठबंधन के नेताओं की आपसी खींचातानी का असर लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के प्रदर्शन पर देखने को मिला है. कांग्रेस के कई नेता जेडीएस को अधिक महत्व देने से नाराज हैं, तो वही जेडीएस के नेता कुछ ऐसा ही आरोप कांग्रेस पर लगाते रहे हैं. इसके अलावा कांग्रेस की अंदरूनी कलह भी, राज्य में सरकार को डांवाडोल करने के कारकों में से एक माना जा रहा है. उदाहरण के तौर पर, बीते सोमवार को ही कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रोशन बेग ने लोकसभा चुनाव में मुसलमान समुदाय की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए बगावती तेवर दिखाए. रोशन बेग ने यहां तक कहा कि अगर केंद्र में राजग सरकार दोबारा लौटती है तो मुसलमानों को भी कांग्रेस का साथ छोड़ देना चाहिए.

कर्नाटक कांग्रेस इकाई के बागी नेताओं के ये सुर उनकी राज्य इकाई के वरिष्ठ नेताओं के व्यवहार के कारण आ रहे हैं. हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, रोशन बेग जैसे नेता पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया या केसी वेणुगोपाल जैसे नेतृत्वकर्ताओं से नाराज हैं. डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, बेग ने कहा कि वेणुगोपाल हों या सिद्धारमैया या फिर गुंडू राव, इन लोगों के अहंकार के कारण पार्टी की यह हालत है. सिद्धारमैया जैसे लोग सरकार गठन के बाद से ही कह रहे हैं कि वे फिर से राज्य के सीएम बनने वाले हैं. यह क्या है? इन्हीं लोगों के कारण मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को ईमानदारी से काम करने में दिक्कत हो रही है. बहरहाल, कर्नाटक में सत्ताधारी गठबंधन की आपसी खींचातानी, प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के लिए सुनहरे मौके से कम नहीं है.

(इनपुट – एजेंसी)