पटना: बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को दावा किया कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने पेशकश की थी कि अगर चारा घोटाला मामले में सीबीआई नरमी बरते तो वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धूल चटाकर भाजपा की सरकार बनाने में मदद करेंगे. पटना में आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुशील ने कहा कि लालू ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास अपने दूत के तौर पर पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता को दो बार भेजा था और बाद में गुप्ता के साथ जेटली से स्वयं भी मिले थे, पर उनकी पेशकश ठुकरा दी गई थी. Also Read - तेजस्वी ने नीतीश पर की व्यक्तिगत टिप्पणी, सीएम बोले- राजनीति में आगे बढ़ना है तो ठीक से व्यवहार करना सीख लो

सुशील ने कहा, “मैं उन सटीक तारीखों को याद नहीं कर सकता, जिन पर लालू के दूत प्रेमचंद गुप्ता जेटली से मिले थे. लेकिन यह नवंबर 2014 के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ, जिसमें उन्हें कुछ राहत प्रदान की गई थी.’’ सुशील मोदी के दावों का लालू के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव और हम प्रमुख जीतन राम मांझी ने खंडन किया है. Also Read - Bihar Politics: तेजस्वी यादव पर भड़के नीतीश कुमार, बोले- मेरे दोस्त का बेटा है, इसलिए सुन लेता हूं

उल्लेखनीय है कि जून 2013 में भाजपा से नाता तोड़ने के बाद 2014 में संपन्न लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हुई पराजय की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए नीतीश ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उत्तराधिकारी के तौर पर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था. 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में उस समय जदयू के 100 से अधिक विधायक थे जबकि भाजपा के पास लगभग 90 विधायक थे. Also Read - Lalu yadav Bail: धरे रह गए राजद के अरमान, नहीं मिली लालू को बेल, फैसला अब 11 दिसंबर को

फरवरी 2015 में जदयू द्वारा मांझी के स्थान पर नीतीश को मुख्यमंत्री के रूप चुने जाने पर मांझी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और जदयू में अपने समर्थक नेताओं के साथ मिलकर हम-सेक्युलर नामक अपनी अलग पार्टी बना ली थी.

दिलचस्प बात यह है कि लालू ने उस समय नीतीश का समर्थन किया था और मांझी पर केंद्र में भाजपा नीत राजग सरकार के हाथों में खेलने का आरोप लगाया था. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के समय मांझी भाजपा नीत राजग गठबंधन में शामिल हो गए थे, पर मात्र एक सीट पर विजयी रहे थे. नीतीश ने महागठबंधन में शामिल राजद और कांग्रेस से नाता तोड़कर पिछले साल भाजपा के साथ मिलकर बिहार में राजग की नई सरकार बना ली थी. इसके कुछ ही महीने बाद मांझी राजग छोड़ महागठबंधन में शामिल हो गए.

मांझी ने कहा “सुशील मोदी जो कह रहे हैं वह निराधार है. यह केंद्र में और बिहार में एनडीए सरकार की विफलताओं के लिए एक कवर-अप है, जहां नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी द्वारा भाजपा के साथ हाथ मिलाने के लिए ब्लैकमेल किया गया था.’’ उन्होंने कहा “मैंने नीतीश और लालू दोनों के साथ काम किया है. मैं अनुभव से कह सकता हूं कि लालू अपने विरोधियों से खुलकर लड़ते हैं. वह नीतीश की तरह नहीं हैं.’’

सुशील मोदी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी ने ट्वीट किया, ‘सुशील मोदी हार देख बौखला गए हैं. मानसिक दिवालिएपन की पराकाष्ठा लांघ कर कह रहे हैं कि लालूजी संघ से मिले हुए हैं. लालू जी वो हैं जिन्होंने संघियों की आंखों में उंगली डाल बिगड़ैल बलवाई संघियों की नाक में रस्सी पिरोई है.’ तेजस्वी ने यह भी कहा, ‘‘लालू जी ने संघ की घृणित नफरती राजनीति को बिहार में पांव पसारने नहीं दिया. आडवाणी जी को नकेल डाल उनकी उन्मादी यात्रा को रोका. 15 वर्ष में एक भी दंगा नहीं होने दिया.’’

सुशील मोदी ने यह दावा ऐसे समय में किया है जब पिछले ही दिनों राजद प्रमुख लालू की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने दावा किया था कि भाजपा से मोहभंग हो जाने पर नीतीश ने अपने दूत प्रशांत किशोर के जरिए फिर से महागठबंधन में शामिल होने का असफल प्रयास किया था.

मोदी ने कहा, ‘‘ मैं यह खुलासा सिर्फ लालू प्रसाद के चरित्र को रेखांकित करने के लिए कर रहा हूं, जो अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. वह अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी नीतीश कुमार को धूल चटाने की पेशकश भी कर रहे थे और बाद में उनके साथ मिलकर महागठबंधन भी बनाया.’’ सुशील ने लालू पर आरोप लगाया ‘लालू भाजपा-आरएसएस गठबंधन के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं. लेकिन वह कभी हमारी मदद लेने में हिचकते नहीं थे. 1970 के दशक में पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव जीतने में एबीवीपी की मदद हो या दो दशक बाद बिहार के मुख्यमंत्री बनने के लिए हो.’’ उन्होंने कहा, ‘‘लोग इन चीजों को वैसे समय में जानना चाहते थे जब उनकी तरफ से बहुत कुछ कहा जा रहा है.’’ सुशील का इशारा तेजस्वी और उनकी मां राबड़ी देवी के उन हालिया दावों की ओर था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जुलाई 2017 में राजग में लौटने के बाद नीतीश का भाजपा से छह महीने के भीतर ही मोहभंग हो गया था और राजद के साथ तालमेल का असफल प्रयास करने के लिए उन्होंने अपने दूत प्रशांत किशोर को भेजा था.