अहमदाबादः भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालाकृष्ण आडवाणी संभवतः इस बार का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. 91 वर्षीय आडवाणी अब तक गुजरात की राजधानी गांधीनगर से चुनाव लड़ते थे. लेकिन गुरुवार को भाजपा की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची में इस सीट से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को उम्मीदवार बनाया गया है. इसको लेकर आडवाणी की चुनावी राजनीति समाप्त होने के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि, आडवाणी ने इस बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है. दो दिन पहले उनके निजी सचिव दीपक चोपड़ा ने कहा था कि वयोवृद्ध नेता के चुनाव लड़ने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया गया है. इस बारे में कोई प्रस्ताव आने पर वह निर्णय लेंगे.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री रह चुके आडवाणी गांधीनगर सीट से छह बार सांसद चुने जा चुके हैं. 1984 के लोकसभा चुनाव में केवल दो सीटें जीतने वाली भाजपा के उदय का श्रेय आडवाणी को दिया जाता है. उन्होंने 2014 में नरेंद्र मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी, तब से वह हाशिए पर हैं. दीपक चोपड़ा ने यह भी कहा था कि चुनाव लड़ने के बारे में पार्टी ने आडवाणी से कोई संपर्क नहीं किया था. आडवाणी ने भी इस बारे में पार्टी से कुछ नहीं कहा था.

भाजपा की गुजरात प्रदेश इकाई ने मांग की थी कि गांधी नगर सीट से या तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को या फिर शाह को उम्मीदवार बनाया जाए. पार्टी पर्यवेक्षक निमाबेन आचार्य ने बताया था कि भाजपा ने 16 मार्च को पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की राय जानने के लिए गांधीनगर में पर्यवेक्षकों को भेजा था और इनमें से अधिकतर ने शाह का पक्ष लिया.