Lok Sabha Election 2019: राजस्थान की 25 सीटों पर राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच शह-मात का खेल जारी है. बीते साल के अंत में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे ने इस चुनाव को और रोचक बना दिया है. विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच वोट का फासला बहुत कम था. वोट शेयर में मामूली अंतर के कारण विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच सीटों का भी फासला बहुत ज्यादा नहीं रह गया था. तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी. इतना ही नहीं राज्य में दोनों दलों के वोट शेयर करीब-करीब बराबर थे. इस कारण लोकसभा चुनाव भी काफी रोचक हो गया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 25 की 25 सीटें भाजपा ने जीती थी. Also Read - Coronavirus in Rajasthan Update: कोविड-19 संक्रमण के 204 नए मामले, अब तक 443 लोगों की हुई मौत, जानें कहां कितने केस

दरअसल, आंकड़ों को देखें तो 2018 के विधानसभा में कांग्रेस को भाजपा की तुलना में केवल 0.5 फीसदी अधिक वोट मिले थे. लेकिन वोटों में मामूली अंतर के बावजूद कांग्रेस की सीटों की संख्या 100 थी जबकि भाजपा 73 सीटों पर सिमट गई थी. अगर इस लोकसभा चुनाव में भी दोनों दलों के बीच वोट के शेयर यही रहे तो मुकाबला कांटे का होगा. लेकिन विधानसभा चुनाव में जीते बड़ी संख्या में निर्दलीयों ने इस पूरे गणित को बदल दिया है. पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य में बड़ी संख्या में निर्दलीय चुनाव जीते थे. Also Read - Locust को कंट्रोल करने जैसलमेर में हेलिकॉप्‍टर तैनात, 6 राज्‍यों के 70 जिले में फैल चुकी हैं टिड्डियां

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वोटिंग का यही पैटर्न रहा तो भाजपा को 13 और कांग्रेस को 12 सीटें मिल सकेंगी. लेकिन, राज्य में अशोक गहलोत की सरकार बनने के बाद 13 निर्दलीय विधायकों में से 12 कांग्रेस में शामिल हो गए थे. अगर इन विधायकों को मिले वोट को जोड़ दिया जाए तो वोट शेयर के मामले में कांग्रेस काफी आगे निकलती दिख रही है. इन निर्दलीयों को 2.8 फीसदी वोट मिले थे. इस तरह कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट शेयर का फासला तीन फीसदी होता दिखा रहा है. अगर ऐसा होता है तो राज्य की 25 में से 16 सीटों पर कांग्रेस कब्जा जमा सकती है. Also Read - 'सत्ताधारियों और अपराधियों' की मिलीभगत का खामियाजा कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है' : अखिलेश यादव