पटना. बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर फॉर्मूला भले तय हो गया हो, लेकिन मतैक्यता नहीं बन पाई है. शायद इसी कारण गठबंधन के विभिन्न दलों में कुछ सीटों को लेकर अनिर्णय की स्थिति अब भी कायम है. इन सीटों में सबसे प्रमुख है मधेपुरा संसदीय सीट, जहां से अभी तक राजद के चिह्न पर दिग्गज नेता शरद यादव के मैदान में उतरने की चर्चा है. वहीं, वर्तमान में मधेपुरा से सांसद और जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी इसी सीट से चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहे हैं. इस सीट पर अपनी दावेदारी पुख्ता करने के लिए वे इन दिनों ‘सेवक’ बन गए हैं. पप्पू यादव ने अपने ऑफिशियल टि्वटर हैंडल पर नाम के आगे ‘सेवक’ जोड़ लिया है.

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सोशल मीडिया पर नए नाम के साथ लगातार किए जा रहे उनके पोस्ट्स पर गौर करें तो उन्होंने साफ तौर पर इस बात का संकेत दे दिया है कि वे 2019 का लोकसभा चुनाव भी मधेपुरा से ही लड़ने वाले हैं. मीडिया रिपोर्टों ने इसकी पुष्टि भी कर दी है. खबर है कि सेवक पप्पू यादव आगामी 28 मार्च को मधेपुरा संसदीय सीट से नामांकन पर्चा भरने जा रहे हैं. पप्पू यादव ने सोमवार को कहा कि वह लोकसभा चुनाव के लिए 28 मार्च को मधेपुरा से अपना नामांकन भरेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह 12 दिनों से बहुत अपमान झेल रहे हैं. कांग्रेस में शामिल होने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद उन्होंने कहा कि वह पिछले 12 दिनों से संविधान और लोकतंत्र बचाने के लिए काफी अपमान झेल रहे हैं. सियासी जानकार पप्पू यादव के इस कदम को महागठबंधन में ‘सेंध’ के तौर पर देख रहे हैं. क्योंकि मधेपुरा से शरद यादव के नाम की पुष्टि भले न की गई हो, लेकिन इससे पहले पप्पू यादव के नामांकन पर्चा भरने की खबरों से एक बार फिर बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मचनी तय है.

पूर्व में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता रहे पप्पू यादव ने सोमवार को ट्वीट कर कहा, “मैं संविधान और लोकतंत्र बचाने के लिए 12 दिनों से बहुत अपमान झेल रहा हूं. अब और नहीं. 28 मार्च को मधेपुरा से अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करूंगा. देखना है कि दिल्ली, पटना तय करेगा या मधेपुरा तय करेगा कि उसका सेवक कौन होगा?” उल्लेखनीय है कि पप्पू यादव कांग्रेस में शामिल होने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे. उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा कि कांग्रेस नेतृत्व जो कहेगा वे वह करेंगे. कांग्रेस चाहेगी तो वह पार्टी में भी शामिल हो सकते हैं. इस दौरान वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं. इस बयान के बाद ऐसा लगता है कि कांग्रेस से उनकी बात नहीं बनी है. आपको बता दें कि पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस की नेता हैं और 2014 लोकसभा चुनाव में सुपौल से विजयी हुई थीं.

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मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान होना है. एनडीए की ओर से जनता दल (युनाइटेड) ने यहां दिनेश चंद्र यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है. वहीं, महागठबंधन ने नाम का फैसला तो नहीं किया है, लेकिन जदयू के बागी नेता शरद यादव के ही इस सीट से प्रत्याशी बनने की संभावना है. गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शरद यादव मधेपुरा संसदीय सीट से जदयू के टिकट पर मैदान में उतरे थे. उस समय राजद के उम्मीदवार के तौर पर इन्हीं पप्पू यादव ने उन्हें पटखनी दी थी. इस बार जबकि सियासी समीकरण बदल गए हैं, यादव वोट बैंक के इस गढ़ में मतदाता किस प्रत्याशी के पक्ष में अपना वोट डालेंगे, अभी से कहना मुश्किल है.

(इनपुट – एजेंसी)

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