गया (सुरक्षित) संसदीय सीट पर 11 अप्रैल को मतदान है. इससे पहले पीएम मोदी आज यहां चुनाव प्रचार करने आ रहे हैं. यहां से भाजपा की सहयोगी जदयू के उम्मीदवार विजय मांझी मैदान में हैं तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी उन्हें टक्कर दे रहे हैं. पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी यहां से कोई ‘मांझी’ ही राजनीतिक दलों की नाव को मझधार से बाहर निकलते दिखेगा. पीएम मोदी गया के अलावा जमुई में भी एक चुनावी सभा को संबोधित करेंगे.

एनडीए ने इस चुनाव में निवर्तमान सांसद हरि मांझी का टिकट काटकर जदयू के विजय कुमार मांझी को उतरा है, जबकि महागठबंधन की ओर से हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी मैदान में हैं. यूं तो गया संसदीय क्षेत्र से 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला इन्हीं दो उम्मीदवारों के बीच है.

‘ज्ञान स्थली’ और ‘मोक्ष भूमि’ माने जाने वाले गया में 11 अप्रैल को चुनाव है. गया सुरक्षित संसदीय क्षेत्र बिहार के सबसे अधिक दलित जनसंख्या वाला क्षेत्र है. इस संसदीय क्षेत्र में शेरघाटी, बाराचट्टी, बोधगया, गया टाउन, बेलागंज तथा वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों से परिपूर्ण गया संसदीय क्षेत्र में वर्ष 2009 और 2014 में एनडीए के उम्मीदवार हरि मांझी यहां से सांसद चुने गए थे.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में हरि मांझी को 3,26,230 वोट (मत) मिले थे, वहीं दूसरे नंबर पर रहे रामजी मांझी को 2,10,726 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर जीतन राम मांझी थे जो जद(यू) के टिकट पर चुनावी मैदान में थे. जीतन राम मांझी को 1,31,828 वोट से ही संतोष करना पड़ा था.

गया का बोधगया आज दुनियाभर के बौद्धों का सबसे पवित्र स्थन है. राजग के स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिहार में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचेंगे. स्थानीय नेता और प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के प्रयास में लगे हुए हैं, लेकिन मतदाताओं की चुप्पी सभी उम्मीदवारों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं.

गया के वरिष्ठ पत्रकार बिमलेंदु कहते हैं कि वर्ष 1996 से इस क्षेत्र में छह बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें चार बार भाजपा के उम्मीदवार जीते हैं. भाजपा की परंपरागत सीट माने जाने वाली गया के जद(यू) के खाते में चले जाने से भाजपा के कई कार्यकर्ता नाराज जरूर हैं, मगर पार्टी के फैसले को लेकर सभी जद(यू) के उम्मीदवार को विजयी बनाने की बात कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मुख्य समस्या किसानों के लिए सिंचाई और नक्सलवाद रही है. उन्होंने बताया, “गया लोकसभा में मांझी समाज की संख्या ढाई लाख है जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या पांच लाख है. इसके अलावा अन्य जातियों के भी मत महत्वपूर्ण हैं.” उन्होंने कहा कि दोनों गठबंधन में मुकाबला कांटे का है. कोई जीते और कोई हारे परंतु अंतर काफी कम होगा.

(इनपुट- आईएएनएस)