मोदी-आंधी ने काट दी वंशवाद की बेल, परिवारवाद का सूपड़ा हुआ साफ

बिहार में लालू तो यूपी में मुलायम और कर्नाटक में देवेगौड़ा परिवार को लगा झटका.

Published date india.com Published: May 24, 2019 9:33 AM IST
मोदी-आंधी ने काट दी वंशवाद की बेल, परिवारवाद का सूपड़ा हुआ साफ

नई दिल्ली. इस बार के लोकसभा चुनाव के परिणाम कई मायनों में खास रहे हैं. इस चुनाव में न केवल जातिवाद का गणित फेल हुआ है, बल्कि वंशवादी राजनीति को भी भारी झटका लगा है. मोदी-आंधी ने वंशवाद की बेल को काटकर परिवारवाद की राजनीति का सूपड़ा साफ कर दिया है. राजनीतिक परिवार से आने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है. उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह का परिवार हो, या बिहार में लालू प्रसाद का परिवार हो, या फिर हरियाणा में हुड्डा परिवार और महाराष्ट्र का पवार परिवार. सभी परिवारों के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है. आइए देखते हैं देश के किन बड़े सियासी परिवारों को इस लोकसभा चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

बिहार

लोकसभा चुनाव में जिस सियासी परिवार के हार की सबसे ज्यादा चर्चा अगले कुछ दिनों तक होने वाली है, वह है बिहार का लालू-परिवार. वर्ष 1990 के बाद से यह पहला मौका है जब लालू परिवार से जुड़े लोगों को किसी भी चुनाव में इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है. इस लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का खाता तक नहीं खुला. और तो और परिवार की बेटी और उससे जुड़े समधी को चुनावी हार का भी सामना करना पड़ा है. लालू के जेल में होने के कारण पार्टी की कमान उनके पुत्र तेजस्वी यादव के हाथों में है. तेजस्वी की बहन मीसा भारती को पाटलिपुत्र संसदीय सीट से भाजपा के रामकृपाल यादव ने हरा दिया है. वहीं, तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय भी सारण में चुनाव हार गए हैं.

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यूपी

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल रालोद के नेता अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी भी चुनाव हार गए हैं. मुलायम सिंह यादव की बहू और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी कन्नौज में चुनाव हार गई हैं. बदायूं में मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेद्र यादव को भाजपा की संघमित्रा मौर्य ने हरा दिया है. एक अन्य भतीजे अक्षय यादव फिरोजाबाद को भी भाजपा के डॉ. चंद्रसेन जादोन ने चुनाव में शिकस्त दी है. हालांकि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव क्रमश: मैनपुरी और आजमगढ़ से चुनाव जीत गए हैं. इसके अलावा कांग्रेस के दिवंगत नेता जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश की धौरहरा सीट पर तीसरे स्थान पर हैं.

हरियाणा

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हरियाणा में 2014 का प्रदर्शन दोहराया है और सभी 10 लोकसभा सीटों पर अपना कब्जा जमाया है. इस क्रम में जिन परिवारों पर मोदी-आंधी का असर पड़ा, उनमें पहला नाम हुड्डा-फैमिली का है. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिह हुड्डा के बेटे कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक सीट पर हार गए हैं. वहीं उनके पिता सोनीपत सीट हार गए. हरियाणा में ही पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह के बेटे भाजपा उम्मीदवार ब्रिजेंद्र सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के परिवार की तीसरी पीढ़ी के भव्य बिश्ननोई को पराजित किया.

मध्यप्रदेश

लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश का परिणाम कांग्रेस के लिए चौंकाने वाला रहा है. क्योंकि छह महीने पहले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस यहां सिर्फ एक सीट पर चुनाव जीत पाई है. छिंदवाड़ा सीट से सीएम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने चुनावी जीत दर्ज कर अपने परिवार को तो सीट दिला दी, लेकिन कांग्रेस की एक परंपरागत सीट से माधव राव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया हार गए. ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की गुना सीट से चुनाव हार गए हैं. सिंधिया के लिए यह दोहरी हार है, क्योंकि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे, जहां पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया है.

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, दोनों दलों के परिवारवादी राजनीति को इस चुनाव में झटका लगा है. एक तरफ जहां कांग्रेस नेता दिवंगत मुरली देवड़ा के पुत्र मिलिंद देवड़ा मुंबई दक्षिण सीट हार गए हैं. वहीं, दिग्गज मराठा नेता शरद पवार को झटका लगा है. हालांकि पवार की बेटी सुप्रिया सुले बारामती से तीसरी बार चुनाव जीती हैं, लेकिन उनके भतीजे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र पार्थ मावल से चुनाव हार गए हैं.

राजस्थान

राजस्थान में भी परिवारवाद को भाजपा ने तगड़ा झटका दिया है. यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर सीट से चुनाव मैदान में उतारा था. तमाम प्रयासों के बाद भी वैभव गहलोत को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा. हालांकि जिस भाजपा ने परिवारवाद के नाम पर कांग्रेस का सफाया किया, उसी पार्टी के परिवार को चुनाव में जीत भी मिली है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह झालवाड़-बारन सीट से चुनाव जीत गए हैं.

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तेलंगाना-कर्नाटक

छह महीने पहले तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में जिस तरह के चंद्रशेखर राव ने अपनी पार्टी टीआरएस को बंपर जीत दिलाई थी, उसकी पृष्ठभूमि में लोकसभा चुनाव में इस पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद थी. लेकिन लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री केसी राव अपनी बेटी कविता कलवाकुंतला को नहीं जितवा पाए. उनकी बेटी निजामाबाद संसदीय सीट से हार गईं. उधर, कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के एक पोते प्राज्वल रेवन्ना हासन से तो जीत गए, लेकिन दूसरा पोता निखिल कुमारस्वामी मांड्या से चुनाव में हार गया. निखिल मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बेटे हैं. वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा खुद तुमकुर सीट से चुनाव हार गए.

(इनपुट – एजेंसी)

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