नई दिल्ली: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने और जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर एनडीए की सहयोगी पार्टी शिवसेना के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने में लगे हुए हैं. शिवसेना को उम्मीद है कि प्रशांत किशोर के आने से पार्टी के सीटों की संख्या बढ़ेगी. बीजेपी और शिवसेना महाराष्ट्र की 48 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ रही हैं. शिवसेना 23 सीटों पर वहीं बीजेपी 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं. हालांकि एक बिहारी नेता से सलाह लेने को लेकर शिवसेना के स्थानीय नेताओं में असंतोष है और मनमुटाव की खबरें आ रही हैं. हालांकि स्थानीय नेताओं की नाराजगी के बावजूद किशोर रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं. उन्होंने गुरुवार को भी पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कम से कम पांच निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रजेंटेशन दिया.

हमारे सहयोगी डीएनए अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशांत किशोर के खिलाफ गुस्से की कई वजहें हैं.शिवसेना एक कैडर-आधारित पार्टी है जहां पार्टी के महत्वपूर्ण फैसले ठाकरे ही लेते हैं. वहीं स्थानीय नेताओं का मानना है कि हर निर्वाचन क्षेत्र के लिए नियुक्त 40 सदस्यीय किशोर की टीम को जमीनी स्तर की समझ नहीं है. सेना नेतृत्व के करीबी पार्टी नेताओं का मानना है कि किशोर के पार्टी अध्यक्ष बनने से पहले उद्धव ठाकरे ने पहले ही सभी निर्वाचन क्षेत्रों और उससे जुड़ी समस्याओं का विस्तृत अध्ययन कर लिया था. उन सभी 23 निर्वाचन क्षेत्रों पर अभियान चलाने के लिए सेना के कार्यकर्ताओं का एक समूह पहले से ही सक्रिय है, जहां शिव सेना चुनाव लड़ रही है. ऐसे में किशोर की सलाह से भ्रम पैदा होगा और नेता का विरोध हो सकता है.

शिवसेना के एक सांसद का कहना है कि लोकसभा के उम्मीदवार इस बात से आहत हैं कि बिहार का एक नेता शिवसेना जैसी महाराष्ट्र की पार्टी के लिए कैसे रणनीति तैयार कर सकता है. एक अन्य सांसद का कहना है कि तीन चीजें प्रभावी हो सकती हैं, मानक परिचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), दिवंगत बाल ठाकरे की विरासत और पार्टी का परोपकारी चरित्र.

बता दें कि किशोर ने सभी 23 निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम 40 व्यक्तियों की एक टीम तैनात की है जो जमीनी हकीकत का समय-समय पर विश्लेषण करेगी और बताएगी कि शिवसेना के पक्ष में वोटों की गिनती बढ़ाने के लिए किस तरह के कदम उठाए जाने की जरूरत है. किशोर ने अपने स्तर पर भी डेटा तैयार किया है जिसमें शिवसेना और बीजेपी के बीच असंतोष के संबंध में निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े और सदस्यों के मतभेदों को दूर करने और सीटें जीतने के तरीकों के लिए सुझाव दिया गया है. इसके अलावा, किशोर ने सभी 23 निर्वाचन क्षेत्रों में 500 से 50,000 तक वोट बढ़ाने के बारे में एक रणनीति बनाई है.

शिवसेना का कहना है कि किशोर ने मतदाताओं को बूथों तक पहुंचाने, मोहल्ला बैठकों की संख्या बढ़ाने और विशेष रूप से संयुक्त रैलियों का आयोजन करने के तरीके सुझाए हैं. यह भी कहा जा रहा है कि किशोर ने सुझाव दिया था कि शिवसेना को कोल्हापुर, सतारा, हटकनंगले, हिंगोली और पालघर सीटें जीतने का प्रयास करना चाहिए ताकि शिवसेना अपने 2014 के प्रदर्शन (18 सीटें) से आगे बढ़ सके.