नई दिल्ली. राजस्थान की जयपुर संसदीय सीट पर पिछले 30 वर्षों में सिर्फ एक बार ही कांग्रेस का उम्मीदवार लोकसभा का चुनाव जीत पाया है. वर्ष 2009 में यहां से महेश जोशी ने कांग्रेस का झंडा बुलंद किया था. मगर 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेता और मौजूदा सांसद रामचरण बोहरा (5 लाख से ज्यादा वोट) ने जिस भारी अंतर के साथ यहां से जीत दर्ज की, उससे तीन दशकों में एक बार सीट गंवाने का भाजपा का ‘दुख’ कम हो गया. इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर वोहरा को ही जयपुर की कमान सौंपी है. वहीं, कांग्रेस ने उम्मीदवार बदल दिया है. कांग्रेस की तरफ से जयपुर लोकसभा सीट से शहर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को टिकट दिया गया है. Also Read - पश्चिम बंगाल में बोले जेपी नड्डा, बहुत जल्द लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून

जयपुर लोकसभा सीट पर ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राष्ट्रीय पार्टी ने यहां से महिला उम्मीदवार को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया है. इससे पहले वर्ष 1977 में महारानी गायत्री देवी ने जयपुर से चुनाव लड़ा था. महराजा सवाई मानसिंह द्वितीय की पत्नी गायत्री देवी यहां से 3 बार सांसद रह चुकी थीं. मगर उनके बाद किसी राष्ट्रीय दल ने महिला उम्मीदवार पर दांव नहीं आजमाया. इस लिहाज से कांग्रेस पार्टी का यह कदम कई मायनों में सराहनीय है. लेकिन इसके पीछे की राजनीति दूसरी कहानी कहती है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने खंडेलवाल को टिकट देकर दरअसल भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है. कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल महाजन जाति से आती हैं, जिसे भाजपा का कोर वोटर माना जाता रहा है. कांग्रेस ने इस जाति के वोट में हस्तक्षेप करने और महिला सशक्तीकरण के दावे के लिए शहर की पूर्व मेयर को चुनाव मैदान में उतारा है. Also Read - Bihar Polls 2020: बिहार चुनाव में गठबंधन 4, लेकिन मुख्यमंत्री पद के हैं ये 6 दावेदार

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जयपुर की बेटी, जयपुर की बहू
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कांग्रेस उम्मीदवार ज्योति खंडेलवाल वर्ष 2009 से लेकर 2014 तक जयपुर की मेयर रह चुकी हैं. चुनाव प्रचार के दौरान खंडेलवाल मतदाताओं को अपना कार्यकाल याद दिलाना नहीं भूलती हैं. वह साथ में यह जोड़ना नहीं भूलती हैं कि उन्हें ‘जयपुर की बेटी, जयपुर की बहू’ समझकर लोग वोट करें. भाजपा के राष्ट्रवाद के मुद्दे और पीएम मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व के शोर के बीच खंडेलवाल यह भी कहती हैं कि जयपुर में उनकी जीत से न सिर्फ विकास की राह प्रशस्त होगी, बल्कि उन्हें टिकट मिलना महिलाओं के प्रति कांग्रेस में सम्मान का नजरिया भी दिखाता है.

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ज्योति की जीत का यह है गणित
जयपुर लोकसभा सीट के तहत 8 विधानसभाएं आती हैं. इनमें हवा महल, विद्याधर नगर, सिविल लाइंस, किशनपोल, आदर्श नगर, मालवीय नगर, सांगानेर और बगरू विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. पिछले साल के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन 8 में से कुल 5 पर जीत हासिल की थी. यही मुख्य वजह है कि लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस और इसके नेताओं को जयपुर सीट से पार्टी उम्मीदवार के जीतने की उम्मीद है. इसके अलावा भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी भी एक वजह है, जिसको लेकर कांग्रेस पार्टी जीत के प्रति आश्वस्त है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘अगर हम कारोबारी समाज के वोट पाने में कामयाब होते हैं, तो जयपुर से हमारी जीत पक्की है. हर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी तादाद में मौजूद कारोबारी समुदाय का वोट अगर कांग्रेस को मिले, कम से कम 50 हजार वोट भी यदि पार्टी पाने में सफल हुई तो भाजपा को हराना कठिन नहीं है.’

भाजपा उम्मीदवार भी कमजोर नहीं
कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल जीत के चाहे जितने भी दावे कर रही हों, लेकिन पिछले चुनाव के नतीजे बताते हैं कि जयपुर को जीतने की राह इतनी आसान नहीं है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा भाजपा सांसद रामचरण बोहरा ने जयपुर में 8 लाख 63 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए थे. वहीं उनके खिलाफ खड़े कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. महेश जोशी को इसके मुकाबले सिर्फ 3 लाख 24 हजार से कुछ ज्यादा ही वोट मिले थे. इस तरह भाजपा और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर 5 लाख से ज्यादा का रहा था. जाहिर है कि इस बार भी रामचरण बोहरा इसी भारी-भरकम जीत की उम्मीदों के साथ चुनाव मैदान में हैं.

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बोहरा की जीत का गणित
भाजपा प्रत्याशी रामचरण बोहरा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं. दरअसल, 1989 से लेकर 2009 तक भाजपा लगातार हर लोकसभा चुनावों में जयपुर लोकसभा क्षेत्र से जीतती रही है. इन वर्षों में भाजपा नेता गिरिधारी लाल भार्गव इस सीट से सांसद चुने जाते रहे. भाजपा की जीत के इस क्रम को 2009 में डॉ. महेश जोशी ने तोड़ा जरूर, लेकिन 2014 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस यहां की दोयम दर्जे की पार्टी साबित हुई. बोहरा को इसी कारण उम्मीद है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा यहां से जीतेगी. वैसे ब्राह्मण समुदाय से आने वाले बोहरा के लिए एक और समीकरण सकारात्मक संकेत देता है कि जयपुर से ब्राह्मण प्रत्याशी लगातार चुनाव जीतते रहे हैं. इस बार के चुनाव में बोहरा को कांग्रेस से टक्कर मिलने की संभावना तो दिख रही है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि आतंकवाद के खिलाफ भाजपा सरकार की नीति और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों के चुनाव में हावी होने के बाद उनकी जीत आसान होगी.

बहरहाल, जयपुर लोकसभा सीट से ज्योति खंडेलवाल का दावा हो या रामचरण बोहरा की उम्मीद, लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में जब 6 मई को यहां मतदान होगा, उस दिन वोटर इन दोनों का भविष्य तय करेंगे. 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा कि जयपुर के मतदाताओं ने भाजपा की नीतियों पर भरोसा जताया या कांग्रेस के सपनों को परवाज दी.