नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के पहले चरण की अधिसूचना जारी होने के बाद भी अभी तक बिहार में महागठबंधन के दलों के बीच सीटों के बंटवारे का फैसला नहीं हो पाया है. लेकिन चुनाव में टिकटों को लेकर संभावित उम्मीदवारों की उम्मीदें परवान चढ़ चुकी हैं. महागठबंधन के सबसे बड़े दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की बात हो या कांग्रेस की, एनडीए से आए रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा की इच्छा हो या पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की आकांक्षा, सभी दलों को अपने-अपने हिसाब से सीटों की दरख्वास्त है. अब 40 सीटों में सबसे ज्यादा सीटें राजद को मिलनी तय है, इसके बाद कांग्रेस और अन्य दलों के बीच सीट बंटने हैं.

सीट बंटवारे की इन खबरों के बीच बिहार के कुछ बाहुबली नेता भी हैं, जिन्हें चुनावी टिकटों की दरकार है. वह भी अपने लिए नहीं, बल्कि पत्नियों के लिए. बाहुबली से जनप्रतिनिधि बने इन नेताओं की ख्वाहिश है कि खुद वे भले चूक जाएं, लेकिन उनकी बीवियां चुनावी अखाड़े में उतरने से न रह जाएं. इसलिए कई बाहुबली नेताओं ने विभिन्न दलों पर लोकसभा चुनाव के टिकटों का दबाव बनाना शुरू कर दिया है, ताकि जैसे भी हो उनकी बीवी लोकसभा पहुंच जाएं. पटना के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक और समाज विज्ञानी प्रो. एस. नारायण ने अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा भी कि बिहार की राजनीति में बाहुबली नेताओं की धमक अब भी कम नहीं हुई है. चुनावी राजनीति के जरिए वे या तो खुद जनप्रतिनिधि बनते हैं या अपनी पत्नियों को सदन तक पहुंचाते हैं. इस बार के लोकसभा चुनाव में भी इन बाहुबलियों का रोल अहम होगा. आइए बिहार के कुछ बाहुबली नेताओं की इसी ख्वाहिश पर डालते हैं एक नजर.

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आनंद मोहन-लवली आनंद
बाहुबली से नेता बने आनंद मोहन अभी जेल में हैं. गोपालगंज के डीएम की हत्या के मामले में वे उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं. वहीं, उनकी पत्नी जो पहले सांसद रह चुकी हैं, अभी हाल ही में कांग्रेस पार्टी में आई हैं. लिहाजा, आनंद मोहन की इच्छा है कि कांग्रेस उनकी पत्नी को शिवहर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव का टिकट दे. वर्ष 1994 में वैशाली संसदीय सीट पर हुए लोकसभा के उपचुनाव में लवली आनंद ने किशोरी सिन्हा को हराया था. किशोरी सिन्हा पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार की मां और बिहार के पूर्व सीएम सत्येंद्र नारायण सिंह की पत्नी हैं. अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, राजपूत जाति के दम पर राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले आनंद मोहन का कहना है कि शिवहर लोकसभा क्षेत्र में राजपूत वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है. इसलिए लवली आनंद को यहां से टिकट मिलना ही चाहिए.

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आनंद मोहन यह दावा भी करते हैं कि लवली बिहार में किसी भी सीट से खड़ी होंगी तो चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन उनके समर्थक चाहते हैं कि वह शिवहर से ही कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार बने. आनंद मोहन ने अखबार के साथ बातचीत में लवली आनंद के टिकट के लिए महागठबंधन को चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले 12 वर्षों से जेल में हूं, लेकिन मेरे समर्थक वोटरों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. लवली आनंद के समर्थक भी पूरे प्रदेश में हैं. मैं महागठबंधन के दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर एक-दो दिन इंतजार करूंगा.’ इधर, लवली आनंद के समर्थकों का कहना है कि टिकट मिलने के वादे पर ही उन्होंने इस साल जनवरी में कांग्रेस की सदस्यता ली थी.

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अनंत सिंह-नीलम देवी
बिहार के बाहुबलियों में सबसे ज्यादा चर्चित नाम आज की तारीख में अगर किसी का है, तो वह है अनंत सिंह. प्रदेश की राजधानी पटना के मोकामा सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने वाले अनंत सिंह जेल में ही थे जब 2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव हो रहा था. उनके जेल में रहने के कारण पत्नी नीलम देवी ने उस समय चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाल रखा था. घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियान चलाने और पति के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी संभालते-संभालते नीलम देवी को भी चुनाव का अनुभव तो हो ही गया होगा. इसलिए पति अनंत की इच्छा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नीलम को टिकट मिल जाए.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, बीते दिनों पटना के गांधी मैदान में हुई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली के आयोजन के समय भी अनंत सिंह चर्चा में आए थे. तभी से उन्हें टिकट मिलने के कयास लगने लगे. चूंकि अनंत सिंह अभी जमानत पर हैं, लिहाजा चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए वे चाहते हैं कि उनकी पत्नी को मुंगेर संसदीय सीट से कांग्रेस अपने उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव का टिकट दे. हालांकि समर्थकों का कहना है कि अगर कांग्रेस पार्टी अनंत सिंह को ही टिकट देती है तो नीलम देवी चुनाव नहीं लड़ेंगी.

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सूरजभान सिंह-वीना देवी
अनंत सिंह और आनंद मोहन की ही तरह बिहार के एक अन्य बाहुबली सूरजभान सिंह उर्फ सूरज सिंह हैं, जिन्हें पत्नी वीना देवी के लिए चुनावी टिकट की दरकार है. हालांकि वीना देवी वर्तमान में मुंगेर संसदीय सीट से लोजपा की सांसद हैं, लेकिन इस बार वह नवादा सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं. आपको बता दें कि नवादा से ही केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सांसद हैं. चर्चा है कि इस बार गिरिराज सिंह को भाजपा बेगूसराय संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाना चाहती है. हालांकि गिरिराज इसके लिए तैयार नहीं हैं. वे पहले कह भी चुके हैं कि वे नवादा से ही 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं. लेकिन सियासी गलियारों में उनके बेगूसराय से ही चुनाव लड़ने की बात मानी जा रही है. सूरजभान चूंकि खुद भी नेता रह चुके हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि उनकी पत्नी को नवादा सीट से इस बार लोकसभा चुनाव का टिकट मिल जाएगा.