नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही देश के सभी राज्यों में सियासी दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं. खासकर, केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोबारा सत्ता में आने के लिए हरसंभव कवायद में जुटी हुई है. जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है या उसके समर्थन से राज्य में सरकार है, वहां तो चुनावी अभियान चल ही रहा है. लेकिन जहां पर भाजपा की सरकार नहीं है, उन राज्यों में पार्टी व्यापक स्तर पर जनता का वोट पाने के प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में कर्नाटक में भाजपा ने 86 साल के बुजुर्ग नेता को यहां के एक समुदाय का वोट पाने के लिए चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है. यह नेता और कोई नहीं, बल्कि पूर्व कांग्रेसी, कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और देश के विदेश मंत्री रह चुके एस.एम. कृष्णा हैं. जी हां, आगामी लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के वोक्कालिंगा समुदाय के दिग्गज नेता माने जाने वाले कृष्णा भाजपा के पक्ष में चुनावी रैलियां करेंगे. आपको बता दें कि कर्नाटक में दो चरणों में लोकसभा के चुनाव होने हैं. लोकसभा चुनाव के लिए राज्य में 18 और 23 अप्रैल को मतदान होना है.

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जाति-समुदाय की राजनीति प्रभावी
कर्नाटक में चुनावों के समय जाति और समुदाय, किसी भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण कारक होते हैं. किसी एक समुदाय का वोट पाने के लिए पार्टियां जी-तोड़ प्रयास करती हैं. 2018 में हुए राज्य के विधानसभा चुनाव में हम इसकी नजीर देख भी चुके हैं. ऐसे में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर, वोक्कालिंगा समुदाय पर अपनी पकड़ बनाने के लिए भाजपा अगर अपने सभी घोड़े खोल रही है, तो इसमें हैरानी की बात है भी नहीं. वोक्कालिंगा समुदाय का वोट अपने पक्ष में करने की भाजपा की मुहिम से राज्य की सियासत में हलचल जरूर तेज होगी. राज्य की कुल आबादी में इसकी संख्या लगभग 8 प्रतिशत है. चूंकि इस समुदाय के दमदार नेता और मौजूदा सीएम एचडी कुमारस्वामी पहले से ही वोक्कालिंगा-लीडर के रूप में जाने जाते हैं. उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं. ऐसे में भाजपा अगर इस वोट-बैंक में सेंध लगाने में कामयाब हो जाती है, तो यह पार्टी के लिए बड़ी सफलता होगी.

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मोदी को दोबारा पीएम बनाना उद्देश्य
राज्य में वोक्कालिंगा समुदाय की बड़ी मौजूदगी ही वह मुख्य वजह है, जिसको लेकर भाजपा ने एसएम कृष्णा जैसे बुजुर्ग को भी चुनावी लाभ के लिए मैदान में उतारने का फैसला किया है. अंग्रेजी अखबार डेक्कन हेराल्ड के अनुसार कर्नाटक में भाजपा के चुनाव प्रभारी आर. अशोक ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें पार्टी के चुनावी अभियान में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया. कृष्णा भी केंद्र में दोबारा से भाजपा की सत्ता वापसी के प्रति ‘गंभीर’ हैं, इसलिए उन्होंने अखबार के साथ बातचीत में कहा भी, ‘भाजपा विचारों के आधार पर राजनीति करती है. इस बार का चुनाव भी किसी व्यक्ति को लेकर नहीं, बल्कि विचारों को लेकर होगा. हम सब की एकमात्र अपेक्षा बस यही है कि नरेंद्र मोदी दोबारा इस देश के प्रधानमंत्री बने. इसलिए हम इसी आधार पर वोट भी मांगेंगे.’

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कृष्णा के काम के नाम पर वोट
भाजपा, लोकसभा चुनाव में एसएम कृष्णा के शासनकाल के दौरान हुए काम के आधार पर वोट बटोरने की योजना बना रही है. खासकर राज्य की राजधानी से जुड़े इलाकों में कृष्णा ने मुख्यमंत्री रहते हुए जिस तरह शहरीकरण की नीतियां बनाई थीं, उसे जनता की काफी सराहना मिली थी. वर्ष 1999 से लेकर 2004 तक के अपने कार्यकाल के दौरान कृष्णा के नेतृत्व में राज्य ने आईटी सेक्टर और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के क्षेत्र में तरक्की की थी. इसका शहरों में व्यापक प्रभाव पड़ा था. बेंगलुरू के तीन लोकसभा क्षेत्रों में कृष्णा के कार्यों को आज भी याद किया जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा कहते भी हैं, ‘बेंगलुरू उत्तर, मध्य और बेंगलुरू दक्षिण लोकसभा सीटों के लोग मेरे कार्यों को आज भी याद करते हैं.’ जाहिर है, भाजपा कृष्णा के इन्हीं कार्यों को लोकसभा चुनाव में भुनाना चाहती है. पार्टी को उम्मीद है कि एसएम कृष्णा ने ये सारे काम कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री रहते किया हो या राज्य में भले ही अभी जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन की सरकार हो, लोकसभा चुनाव में लोग कृष्णा के कामों को याद रखेंगे और भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे.