नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे पर आज-कल में फैसला आ सकता है. प्रदेश में इस गठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP), विकासशील इंसान पार्टी (VIP), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM), लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) और वामपंथी पार्टियां (मुख्यतः सीपीआई) शामिल हैं. मीडिया रिपोर्टों की माने तो गठबंधन में शामिल सबसे बड़ा दल, राजद 20 से 22 सीटों पर चुनाव लड़ सकता है. वहीं कांग्रेस के हिस्से में 11 सीटें दिए जाने का अनुमान है. हालांकि जीतनराम मांझी अपनी पार्टी के लिए 2 से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. वहीं पहले एनडीए में रहे उपेंद्र कुशवाहा भी रालोसपा के हिस्से में ज्यादा सीटों की उम्मीद लगाए बैठे हैं. लेकिन प्रदेश की कुल 40 लोकसभा सीटों में से राजद और कांग्रेस के बाद इन पार्टियों के हिस्से में ज्यादा सीटें आए, इसकी संभावना कम ही दिख रही है.

सबसे बड़ी समस्या जिन दो सीटों को लेकर आने वाली है, वह है पटना साहिब और दरभंगा लोकसभा सीट. पटना साहिब से जहां पिछली बार भाजपा के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव जीते थे, वहीं दरभंगा से पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने बाजी मारी थी. लेकिन पिछले 4-5 वर्षों में इन दोनों नेताओं के लिए राजनीति काफी बदल गई है. कीर्ति आजाद जहां सीधे तौर पर ‘अरुण जेटली से पंगा’ मोल लेकर भाजपा से बाहर हो चुके हैं, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ‘आलाकमान’ को लगातार निशाने पर रखने की अपनी नीति से पार्टी के लिए ‘बेमतलब’ हो चुके हैं. ऐसे में बिहार के सियासी हलकों में राजद-कांग्रेस के सीट बंटवारे की खबरों के बीच इन दोनों ‘बागी’ नेताओं के भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

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सीट बंटवारे पर दलों में नहीं है एकराय
अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, राजद को आगामी लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे के फॉर्मूले के तहत 20 से 22 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, इस बात पर सहमति लगभग बन चुकी है कि कांग्रेस प्रदेश में 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. यानी 40 में से कुल 31 सीटों के अलावा बाकी बची सीटों पर ही वीआईपी, हम, रालोसपा और सीपीआई के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे. इसके तहत रालोसपा के हिस्से में 3 सीटें, वीआईपी को 2, हम को दो और सीपीआई को दो सीटें मिलने की संभावना है. अखबार के अनुसार, शरद यादव की पार्टी को अपने ही चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरने का संकेत मिला है. लेकिन बिहार के प्रमुख अखबार हिन्दुस्तान की मानें तो सीट बंटवारे के इस फॉर्मूले पर विपक्षी महागठबंधन में शामिल दल एकमत नहीं हैं. पूर्व सीएम जीतनराम मांझी अपनी पार्टी के लिए महज 2 सीटों से ही संतुष्ट नहीं हैं.

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जीतनराम मांझी ने बीते दिनों मीडिया के साथ बातचीत में कहा भी कि आगामी 13-14 मार्च को दिल्ली में होने वाली बैठक में ही सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय होगा. मांझी को 40 में से सिर्फ एक-दो सीटों से ही संतुष्टि नहीं है. हिन्दुस्तान की खबर के मुताबिक, मांझी को उम्मीद है कि राजद और कांग्रेस के बाद अन्य घटक दलों के मुकाबले उनकी पार्टी के हिस्से में कम से कम एक सीट अधिक मिलेगी. इसके अलावा, इन्हीं सीटों में से एक पर समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकता है. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार यह राजद की इच्छा पर है कि वह अपने कोटे में से एक सीट सपा के लिए छोड़े या फिर इससे इतर एक सीट का इंतजाम करे. बहरहाल, अगले एक-दो दिनों में बिहार में महागठबंधन के दलों के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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कीर्ति आजाद दिल्ली जाएंगे या दरभंगा में रहेंगे?
बिहार के चुनावी समर में इस बार जिन दो बड़ी सीटों पर सियासतदानों की नजरें टिकी हुई हैं, उनमें पटना साहिब और दरभंगा संसदीय क्षेत्र की सीट शामिल है. इन दोनों ही सीटों पर सभी पार्टियों की निगाह है, क्योंकि ये दोनों क्षेत्र भाजपा के गढ़ माने जाते रहे हैं. पटना साहिब से जहां शत्रुघ्न सिन्हा लगातार कई वर्षों से सांसद रहे हैं, वहीं दरभंगा सीट पर राजद के साथ-साथ भाजपा दावे करती रही है. पटना साहिब सीट से शत्रुघ्न सिन्हा के राजद के कोटे से चुनाव में उतरने के कयास लग रहे हैं. माना जा रहा है कि भाजपा से टिकट न मिलने की सूरत में सिन्हा को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से उनकी पुरानी दोस्ती का लाभ मिल सकता है. इसी दोस्ती और भाजपा-विरोधी उनके बयानों के कारण पटना साहिब से वे इस बार का लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं.

इधर, दरभंगा से मौजूदा भाजपा सांसद कीर्ति आजाद भले आज पार्टी के लिए बागी हो गए हों, लेकिन वे इसी सीट से सांसद बनते रहे हैं. लेकिन ताजा हालात और महागठबंधन के बीच सीट बंटवारा होने के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि कीर्ति आजाद संभवतः इस बार का लोकसभा चुनाव दिल्ली से लड़ेंगे. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, महागठबंधन में सीट बंटवारा पर बने फॉर्मूले के तहत दरभंगा लोकसभा सीट मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के हिस्से में जाने वाली है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है कि वह कीर्ति आजाद को दिल्ली में किसी सीट से चुनाव में उतार सकती है.

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लेकिन इसके विपरीत हिन्दुस्तान अखबार में छपी खबर को माने तो दरभंगा लोकसभा सीट कांग्रेस के कोटे में आई है. यानी कीर्ति आजाद अपनी पारंपरिक सीट से एक बार फिर उम्मीदवार बनेंगे, हां उनकी पार्टी जरूर बदल जाएगी. दरभंगा सीट पर सामाजिक समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी को यह उम्मीद भी है कि आजाद के नाम के सहारे वह यह सीट अपनी झोली में डाल सकती है. हालांकि दोनों ही अखबारों की खबरों की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि कीर्ति आजाद दरभंगा से चुनाव लड़ सकेंगे या फिर दिल्ली में अपनी नई पार्टी कांग्रेस का झंडा बुलंद करेंगे.