जयपुर. लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद नेताओं की दल बदलने की परिपाटी नई नहीं है. इसलिए गुरुवार को जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के दिग्गज नेता टॉम वडक्कन को अपनी पार्टी में शामिल कराया, तो सियासी जानकारों को बहुत हैरानी नहीं हुई. क्योंकि इससे पहले देश के कई राज्यों में कांग्रेस समेत कई अन्य दलों के नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबरें आई हैं. लेकिन दिन बीतते-बीतते भाजपा के लिए ऐसी ही निराश कर देने वाली खबरें सुर्खियों में छा गई. दरअसल, गुरुवार को उत्तराखंड के दिग्गज भाजपा नेता बीसी खंडूरी के बेटे के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा, तो शुक्रवार को राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता देवी सिंह भाटी की ऐसी ही घोषणा से सियासी विश्लेषक हैरान रह गए.

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राजस्थान भाजपा के दिग्गज नेता देवी सिंह भाटी के कद को सिर्फ इसी बात से समझा जा सकता है कि वह प्रदेश विधानसभा में लगातार सात बार विधायक रहे हैं. बीकानेर के कोलायत से विधायक रहे भाटी के पार्टी छोड़ने से ज्यादा उनके द्वारा बताया गया कारण, मीडिया में ज्यादा चर्चित रहा. क्योंकि उन्होंने यह कदम केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को बीकानेर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव का टिकट दिए जाने के विरोध में उठाया. भाटी की नाराजगी इतनी थी कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने जीवन के कई साल दिए, शुक्रवार को उसकी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. बीकानेर के सांसद मेघवाल को लोकसभा टिकट दिए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए भाटी ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी हाईकमान को भेज दिया है.

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वरिष्ठ नेता के भाजपा छोड़ने को लेकर मीडिया में जितनी चर्चा हुई, उससे कहीं ज्यादा दुखी खुद देवी सिंह भाटी थे. उन्होंने अपना यह दर्द बयां भी किया. भाटी ने कहा, “पार्टी से इस्तीफा देकर मुझे दुख हो रहा है, लेकिन मुझे यह खबर सुनकर वाकई दुख हुआ है कि सांसद और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को बीकानेर लोकसभा सीट से दोबारा टिकट दिया गया है.” उन्होंने कहा, “मेघवाल पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं और मैंने पार्टी को इसके बारे में सूचित किया है. पार्टी नेताओं ने कहा कि वे इस मामले को देखेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ. मैं असहाय महसूस कर रहा हूं, और मैंने इस्तीफा देना उचित समझा.”

(इनपुट – एजेंसी)