Lok Sabha Election Results: लोकसभा चुनावों के नतीजों  में मध्य प्रदेश में भी भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है. कुछ महीने पहले ही विधानसभा चुनावों में सत्ता से बेदखल होने के बावजूद आम चुनावों में भाजपा ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है. राज्य की कुल 29 सीटों में से 28 सीट पर कब्जा कर भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. कांग्रेस के खाते में सिर्फ छिंदवाड़ा की सीट गई है. इस सीट पर मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ को सफलता मिली है. भाजपा ने अपने मौजूदा 26 सांसदों में से 13 सांसदों को ही टिकट दिया था. इनमें से सभी ने जीत दर्ज की है. वहीं, कांग्रेस ने अपने तीन मौजूदा सांसदों में से केवल दो सांसदों – ज्योतिरादित्य सिंधिया (गुना) एवं कांति लाल भूरिया (रतलाम) को मैदान में उतारा था, लेकिन ये दोनों सांसद अपनी सीट बचाने में कामयाब नहीं रहे.

भाजपा ने चार महिलाओं- प्रज्ञा सिंह ठाकुर (भोपाल), संध्या राय (भिण्ड), हिमाद्रि सिंह (शहडोल) एवं रीति पाठक (सीधी) को मध्य प्रदेश में प्रत्याशी बनाया था. चारों अपनी-अपनी सीटें जीतने में सफल रहीं. इसके विपरीत कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिया था, जिनमें से सभी हार गईं.

भाजपा ने कई राज्यों में 50 फीसदी से अधिक मत हासिल किए, कांग्रेस सिर्फ राज्‍य में सिमटी

भाजपा का लोकसभा चुनावों में मध्य प्रदेश में यह अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है. इससे पहले भाजपा ने 2014 की मोदी लहर में लोकसभा चुनाव में राज्य की 29 में से 27 सीटों पर कब्जा किया था. उस वक्त कांग्रेस को दो सीटें- छिंदवाड़ा एवं गुना पर जीत हासिल हुई थी. इस बार भाजपा ने गुना सीट भी कांग्रेस से छीन ली है.

जीत का मार्जिन भी बढ़ा
मध्य प्रदेश में अधिकतर सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले काफी बढ़ा है. भाजपा के केवल दो उम्मीदवार ऐसे रहे, जो करीब 90,000 एवं 1 लाख मतों के अंतर से जीते. बाकी सभी भाजपा प्रत्याशी 1 लाख से 5 लाख के बड़े अंतर से विजयी रहे. वहीं, छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नकुलनाथ ने भाजपा के नथन शाह को मात्र 37,536 मतों के अंतर से हराया. यह मध्य प्रदेश में इस बार हार का सबसे कम अंतर है.

1977 में भी सिर्फ छिंदवाड़ा सीट ही जीती थी कांग्रेस
गुना लोकसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार का मुंह देखना पड़ा है. चार बार सांसद रहे सिंधिया को पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे भाजपा के कृष्ण पाल यादव ने 1,25,549 मतों के अंतर से पराजित किया. करीब चार दशक पहले देश में लगे आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में अविभाजित मध्य प्रदेश (मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़) में तत्कालीन भारतीय जनसंघ को कुल 40 सीटों में से 39 सीटें मिली थी. उस समय भी कांग्रेस केवल एक सीट छिंदवाड़ा को ही अपनी झोली में डालने में कामयाब रही थी.

भारतीय जनसंघ के खत्म होने के बाद ही वर्ष 1980 में भाजपा पैदा हुई. 2001 में मध्य प्रदेश का बंटवारा कर मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ दो राज्य बनाए गए. अविभाजित मध्य प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों में से 11 सीटें छत्तीसगढ़ में चली गईं और 29 सीटें मध्य प्रदेश में रह गईं.

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