कोलकाता. लोकसभा चुनाव करीब आ चुका है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता तो दूर की बात, इन दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाने से भी बाज नहीं आ रहे. यही वजह है कि चाहकर भी ये दल भाजपा की आक्रामक चुनाव प्रचार नीति के आगे बेबस दिखते हैं. अलबत्ता मीडिया में भी इन दलों की आपसी खींचतान गाहे-बगाहे जाहिर हो जाती है. ताजा उदाहरण कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का है. राहुल गांधी चुनाव प्रचार के क्रम में पिछले दिनों बंगाल पहुंचे तो भाजपा के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा. इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी पर भी आरोप लगाए. इस पर जब ममता बनर्जी से प्रतिक्रिया ली गई, तो ममता ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा, ‘वह अभी बच्चे हैं’. Also Read - Bihar Assembly Election 2020: भाजपा के मेनिफेस्टो पर मचा बवाल, तो BJP ने किया पलटवार

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी सरकार के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को बुधवार को खारिज कर दिया और कहा कि ‘‘वह अभी बच्चे हैं.’’ उन्होंने राष्ट्रीय चुनाव से पहले राहुल के न्यूनतम आय वायदे पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. ममता ने कहा, ‘‘उन्होंने (राहुल) वही कहा है जो महसूस किया. मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगी. वह अभी बच्चे हैं. मैं इस बारे में क्या कहूंगी?’’ दरअसल, राहुल ने पिछले हफ्ते माल्दा में एक चुनावी रैली में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं. उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि बंगाल में कोई बदलाव नहीं हुआ और ममता के कार्यकाल में राज्य में कोई विकास नहीं हुआ. Also Read - Bihar Assembly Election: बिहार में कोरोना वैक्सीन मुफ्त बांटने के वादे से बवाल, बीजेपी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत

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कांग्रेस की बहुप्रचारित योजना, न्यूनतम आय (न्याय) के राहुल गांधी के वादे के बारे में पूछे जाने पर भी ममता ने किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने इस संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा, ‘‘उन्होंने (कांग्रेस) एक घोषणा की है और हमारे लिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.’’ भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के खंड-खंड हो जाने के बाद भी, इन दलों की आपसी बयानबाजी लोकसभा चुनाव में मतदाताओं पर क्या असर डालेगी, यह कहना तो अभी मुश्किल है. लेकिन अगर विपक्षी दलों के नेता एक-दूसरे के खिलाफ यूं ही आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे तो जनता के बीच इनकी छवि को लेकर जरूर सवाल उठेंगे.

(इनपुट – एजेंसी)

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