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प्रचंड मोदी लहर का असर, ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक के ही पर कतरे
लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के जबर्दस्त प्रदर्शन ने विपक्षी दलों में बौखलाहट ला दी है.
कोलकाताः लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के जबर्दस्त प्रदर्शन ने विपक्षी दलों में बौखलाहट ला दी है. एक तरफ कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी लगी है तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदर्शन को दीदी पचा नहीं पा रही हैं. राज्य की 42 से 18 सीटों पर भाजपा के कब्जा जमाने के बाद दीदी ने खुद मुख्यमंत्री पद तक छोड़ने की पेशकश कर दी. उनके इस्तीफे को जब पार्टी ने स्वीकार नहीं किया तो उन्हें वरिष्ठ नेताओं के दबाव में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के ही पर कतरने पड़े. पार्टी में दो नंबर की हैसियत रखने वाले अभिषेक से कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां वापस ले ली गई है. ममता ने अभिषेक से उन सारे जिलों की कमान वापस ले ली है, जहां भाजपा ने जीत दर्ज की है. पार्टी अध्यक्ष ने अन्य नेताओं को यह जिम्मेदारी दे दी है.
ममता बनर्जी ने सभी उम्मीदवारों और वरिष्ठ नेताओं के साथ करीब घंटे भर चली बैठक के बाद कहा, ‘हमने पार्टी संगठन में कई बदलाव किए हैं. अच्छी टक्कर देने के बावजूद हारने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी गयी हैं.’
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे खारिज कर दिया. बनर्जी ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पहला संवाददाता सम्मेलन संबोधित करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने पश्चिम बंगाल में वोट प्राप्त करने के लिए लोगों का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण किया. पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 18 पर जीत दर्ज करके तृणमूल कांग्रेस को एक झटका दिया है. तृणमूल कांग्रेस ने 22 सीटें जीती हैं जो कि 2014 में जीती गई 34 सीटों से कम है.
ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहती थी. कुर्सी मेरे लिए कुछ नहीं. यद्यपि पार्टी ने उसे खारिज कर दिया. मुझे कुर्सी की जरुरत नहीं लेकिन कुर्सी को मेरी जरुरत है.’’ उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने लोगों से किए गए सभी वादे पूरे किये हैं. उन्होंने कहा कि वह अब अपनी पार्टी पर अधिक ध्यान देंगी. उन्होंने कहा, ‘जिस पार्टी ने कोई प्रतिबद्धता नहीं जतायी वह सीटें जीत गई. मेरा मानना है कि मैंने लोगों के लिए अधिक किया है. अब मुझे अपनी पार्टी के लिए काम करने की जरुरत है.’ उन्होंने कहा, ‘धनबल और धार्मिक विभाजन ने बड़ा खेल खेला. प्रशासन को पिछले पांच महीनों से भारत के चुनाव आयोग ने अपने हाथ में ले लिया था. मैं ऐसे में मुख्यमंत्री कैसे रह सकती हूं? इसीलिए मैंने पद छोड़ने की पेशकश की.’
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