कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ‘दो-दो हाथ’ करने की अपनी रणनीति छोड़ नहीं रही हैं. साल की शुरुआत में ही शारदा घोटाले को लेकर सीबीआई की टीम की कार्रवाई पर सियासी ड्रामा करने वाली ममता, लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद एक बार फिर भाजपा के साथ भिड़ने को लेकर आमादा है. इस बार उन्होंने भाजपा के खिलाफ अपरोक्ष रूप से नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भिड़ंत करने का मन बनाया है. बनर्जी ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत हो तो 2019 के चुनाव में बंगाल से चाहे जितनी सीटों से लड़कर दिखाएं. ममता ने कहा कि मोदी नोटबंदी के कदम की तरह यहां फेल हो जाएंगे.

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पीएम मोदी के बंगाल से लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना पर संवाददाताओं के सवाल के जवाब में बनर्जी ने कहा, “कोई भी व्यक्ति किसी भी सीट से चुनाव लड़ सकता है. यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है. मैं भी वाराणसी से लड़ सकती हूं. लेकिन यदि वह बंगाल से लड़ते हैं तो उनकी स्थिति नोटबंदी जैसी होगी. वह जनता की अदालत में दंडित किए जाएंगे.” उन्होंने कहा, “मैं समझती हूं कि देश को उन्होंने जो नुकसान पहुंचाया है, उसके लिए उन्हें लोगों को जवाब देना होगा. वह लड़ें, हमें बहुत खुशी होगी. यदि वह एक सीट से आश्वस्त नहीं हैं, तो सभी 42 सीटों पर लड़ें.”

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आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं. पिछले कुछ वर्षों से भारतीय जनता पार्टी इस राज्य में अपनी जड़ें जमाने के लिए प्रयासरत है. इस क्रम में जहां बंगाल के कई जिलों में पार्टी जनभागीदारी अभियान चला रही है, वहीं केंद्र से लेकर प्रदेश स्तर तक राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने का भी कोई मौका नहीं चूक रही है. पश्चिम बंगाल में वामपंथी पार्टियों को हटाकर दोबारा सत्ता में आई ममता बनर्जी भी भाजपा के सियासी हमलों का जवाब देने में पीछे नहीं रहती हैं. वह लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को उसी तरह की स्थिति में पहुंचाने के प्रयास में जुटी हैं, जिस तरह पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा को पटखनी दी थी.

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हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष के कई बयान इस संदर्भ में काफी चर्चा में भी रहे हैं. बीते दिनों ममता बनर्जी ने कहा था कि लोकसभा चुनाव भाजपा के ताबूत की अंतिम कील होगी. बुधवार को भी मीडिया के साथ बातचीत में उन्होंने भाजपा को हराने का दावा किया. बनर्जी ने कहा, ‘बंगाल के मतदान केंद्र अत्यंत संवेदनशील हैं. वे लड़ें और अपनी राजनीतिक सेना लेकर आएं (आरएसएस, बजरंग दल) वे बंगाल आएं और यहां के भोजन और संस्कृति का आनंद लें. जनता उन्हें बाय-बाय कहेगी.”

(इनपुट – एजेंसी)