नई दिल्ली: कई मौके आते हैं जब जाति-धर्म को इंसान और इंसानियत से अधिक महत्वपूर्ण मान लिया जाता है. मौका चुनाव का हो तो अनगिनत मुद्दे और समस्याएं जाति-धर्म के आगे दम तोड़ देती हैं. वहीँ, ऐसे में शायद ही कोई कल्पना कर सकता है कि एक शख्स ने जाति-धर्म के बंधन को अपनी ज़िन्दगी से न सिर्फ नकार दिया, बल्कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट, लड़ाई लड़ कर ‘नो कास्ट, नो रिलीजन, नो गॉड’ सर्टिफिकेट भी जारी करा लिया. संभवतः देश का ये पहला मामला है, जब किसी को इस तरह का सर्टिफिकेट जारी किया गया है. Also Read - किसान विरोध प्रदर्शन: हरियाणा पुलिस की अपील, NH 10 और NH 44 पर यात्रा करने से बचें, हो सकती है मुश्किल

देश का पहला शख्स जिसे मिला ये तमगा
कई लोग कह देते हैं कि उनका ईश्वर में यकीन नहीं, लेकिन जाति धर्म के इस बंधन को तोड़ आधिकारिक तौर पर ये तमगा हासिल किया है हरियाणा के रवि नास्तिक ने. जाति धर्म में यकीन नहीं था. देश और समाज में जाति धर्म पर चल रहे द्वन्द से व्यथित हरियाणा के नगरी टोहाना के रहने वाले रवि ने अपने नाम के आगे भी नास्तिक लगा लिया है. रवि ने खुद की विचार को अपनाते हुए देश के पहले से नास्तिक कहलवाने का अधिकार प्राप्त किया. Also Read - Farmers Protest Latest Video: हरियाणा पुलिस ने किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस का प्रयोग किया

लड़नी पड़ी लंबी लड़ाई
रवि को ये तमगा आसानी से नहीं मिला है. कोर्ट-कचहरी के गए. अधिकारियों के चक्कर काटने पड़े. रवि ने सबसे पहले प्रशासन से ऐसा सर्टिफिकेट जारी करने की गुहार लगाई. उनकी मांग को सुन अधिकारी भी पशोपेश में पड़ गए. जब मिलते नहीं दिखी तो उन्होंने कोर्ट का रुख किया. लंबी मशक्कत के बाद उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन द्वारा ये सर्टिफिकेट मिल गया. इस सर्टिफिकेट पर बाकायदा सीरियल नंबर भी है. Also Read - Farmers Agitation Latest News: किसान भाई-बहनों को कुछ भ्रम है, सरकार मुद्दों पर बात चर्चा के लिए तैयार है: केंद्रीय कृषि मंत्री

रवि नास्तिक ने दी नेताओं को ये नसीहत
रवि नास्तिक कहते हैं कि जाति धर्म से ऊपर उठकर संदेश देने की कोशिश है. वह कहते हैं कि राजनीति ने भी समाज में जाति धर्म के नाम पर जहर फैलाया है. राजनेता धर्म के नाम पर ही राजनीति कर रहे हैं. वह कहते हैं कि धर्म के नाम पर लोगों को इस तरह से नहीं बांटना चाहिए. सबसे पहले इंसानियत है. युवाओं की सोच को नहीं दबाना चाहिए. नई पीढ़ी को बुरा सोचने पर विवश न किया जाए. आने वाला समय ऐसे युवाओं का है, जो जाति धर्म से ऊपर उठकर सोचते हैं, न कि ऐसी ही बातें करने वाले नेताओं का. वह आगाह करते हैं कि अगर ऐसा चलता रहा तो आने वाले समय में देश के टुकड़े-टुकड़े हो सकते हैं.