नई दिल्ली: 2 जून, 1995. ये वही दिन था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो बड़े धड़े एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हो गए. माया की पार्टी की ओर से ‘चढ़ गुंडन की छाती पर, मुहर लगा दो हाथी पर’ जैसे नारा भी दिया गया. अप्रत्यक्ष रूप से ये नारा सपा के लिए ही था. साल-दर-साल तल्खी में कोई नरमी नहीं आई, बल्कि खाई बढ़ती ही गई. समय बदला और 23 साल बाद ऐसा संयोग हुआ कि मायावती और मुलायम सिंह यादव एक साथ आ गए. और इसके सूत्रधार बने मुलायम के बेटे अखिलेश यादव.

मुलायम के सामने भी गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र करना नहीं भूलीं
23 साल पहले सपा के साथ सरकार में रहीं मायावती ने आज मुलायम सिंह यादव के साथ मंच साझा किया, लेकिन वह उस गेस्ट हाउस कांड को नहीं भूलीं, जिसे बसपा हमेशा काला दिन कहती रही. वहीं, आज जब मायावती ने मुलायम सिंह यादव के साथ मैनपुरी में मंच साझा किया, इसके बाद भी मायावती उस गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र करना नहीं भूलीं, जिसने दोनों पार्टियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया था. मायावती ने मुलायम की मौजूदगी में कहा कि हम गेस्ट हाउस कांड के बाद भी साथ आए हैं.

मायावती ने कहा कि लोग जानना चाहते होंगे गेस्ट हाउस कांड के बाद भी मैं यहां कैसे, तो इसका जवाब मैं पहले भी दे चुकी हूं कि कठिन परिस्थितियों में कठिन फैसले लेने पड़ते हैं. मायावती ने जय भीम के साथ जय लोहिया का भी नारा दिया. भले ही साथ आ गए लेकिन इसके बाद भी मुलायम सिंह यादव के सामने माया वह घटना याद दिलाने से नहीं चूंकि जो दर्द उन्हें सालों तक सालता रहा है. मायावती ने मुलायम के लिए वोट मांग लोगों से उन्हें जिताने की अपील भी की. और मुलायम को पिछड़ों का सबसे बड़ा नेता करार दे दिया. इससे पहले मुलायम सिंह यादव ने शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि हम मायावती के अहसानमंद हैं. जो वो साथ आईं. बसपा हमेशा से सपा की सहयोगी रही है.

मायावती ने मुलायम सिंह यादव को बताया पिछड़ों का असली नेता, PM मोदी पर साधा निशाना

इससे पहले भी एक मंच पर कर चुकी हैं कांड का ज़िक्र
सपा के साथ मंच साझा करते हुए ये पहला मौका नहीं है, जब मायावती ने गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र किया हो. इससे पहले 12 जनवरी, 2019 को जब सपा-बसपा गठबंधन का एलान करने के लिए मायावती ने अखिलेश यादव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र किया था. उन्होंने कहा था कि 1993 में भी दोनों पार्टियां साथ आई थीं. यूपी में सरकार भी दोनों ने बनाई थी, लेकिन कुछ गंभीर कारणों से ज़्यादा समय गठबंधन तक साथ नहीं चल सका था. मायावती ने कहा- गेस्ट हाउस कांड हुआ था, जनहित में उससे ऊपर ये फैसला लिया गया है. हमने गेस्ट हाउस कांड को किनारे कर दिया है. मायावती ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में दो बार गेस्ट हाउस कांड को याद किया. वहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि अब मायावती का अपमान, मेरा अपमान होगा.

ये है गेस्ट हाउस कांड
मायावती अगर आज भी उस कांड को सपा से दोस्ती के बाद भी नहीं भूली हैं तो इसकी वजह भी है. 2 जून, 1995 के इस कांड को न सिर्फ मायावती बल्कि इसके गवाह रहे नेता भी अक्सर याद करते हैं. बसपा से तीन बार विधायक व कैबिनेट मंत्री रहे धूराम चौधरी भी इस घटना के गवाह रहे हैं. धूराम चौधरी गेस्ट हाउस कांड को सबसे दुर्दांत और राजनीति के लिए काला दिन मानते हैं. वह कहते हैं- उस घटना के बाद सपा-बसपा और दो वर्गों के बीच खाई चौड़ी हो गई थी. धूराम चौधरी बताते हैं कि 1993 में बसपा के समर्थन से सपा ने सरकार बनाई थी. बसपा ने समर्थन वापस लिया तो सपा सरकार गिर गई. सपा सरकार गिरने के बाद मायावती मीराबाई गेस्ट हाउस के कॉमन हॉल में विधायकों के साथ मीटिंग कर रही थीं. इसी बीच कुछ प्रेस के लोग आ गए. मायावती ने हमसे कहा कि पहले प्रेस से बात कर लें फिर बात करते हैं. वो अपने सुइट नंबर एक में चली गईं.

गेस्ट हाउस कांड के बाद पहली बार एक मंच पर आए माया-मुलायम, लगा ‘सपा-बसपा आई है’ का नारा

मायावती जहां थीं, वहीं हुआ था हमला
धूराम कहते हैं कि इसके बाद जो घटित हुआ वह इतिहास में काले दिन के रूप में है. 2 जून, 1995 को दोपहर के करीब ढाई बजे थे. इसी बीच समाजवादी पार्टी से जुड़े चार-पांच सौ लोग आ धमके. वहां 40-45 बसपा विधायक थे. इन सब हमला बोल दिया. अचानक हमला बोला गया. कोई कुछ समझ नहीं पाया. भीड़ गालियां दे रही थी. मारपीट की जाने लगी. भीड़ ने कई विधायकों को गाड़ी में डाल लिया. घसीटते हुए गाड़ी में डाला गया. 22 लोग काफी देर तक सपाइयों के कब्ज़े में बने रहे. ‘मारो-मारो, पकड़ो-पकड़ो’ की आवाजें आ रही थीं. बसपा के विधायकों को जूतों से पीटा गया.

इस तरह पानी पर टूट पड़े थे
धूराम बताते हैं कि घटना की रात में हम सुइट नम्बर 1 में ही बंद बने रहे. दो कमरों में हम लोग बैठे रहे. सभी बुरी तरह से डर गये थे. पूरी रात सोये नहीं. फिर भी मुश्किल ख़त्म नहीं हुई. जहां ठहरे थे. वहां का पानी बंद कर दिया गया. बिजली कनेक्शन भी हटा दिया गया. टेलीफोन भी कट गया. हम सब कई घंटों से प्यासे थे. रात के एक बजे सेंट्रल रिज़र्व फोर्स लगा. तब हमें पीने के लिए एक बाल्टी पानी मिला. पानी पर बुरी तरह से टूट पड़े थे. इसके बाद हमें अलग-अलग कमरों में शिफ्ट किया गया. इस तरह वह दिन गुजरा था. मायावती ने इससे नाराज होते हुए अगले ही दिन बीजेपी से गठबंधन कर लिया था. और फिर से सीएम बनीं.

मायावती ने खुद को इस तरह बचाया था
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद बताते हैं कि मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था. वह जिस कमरे में थीं, सपा के लोग उसे भी खुलवाने की कोशिश कर रहे थे. उनके अनुसार दरवाजा टूटने और खुलने से बचाने के लिए मेज और सोफे को दरवाजे से सटाकर लगा लिया गया था. इस तरह मायावती बचीं थीं. मायावती ने इससे पहले भी कई बार गेस्ट हाउस कांड को उन्हें जान से मारने की साजिश बता चुकी हैं. आज भी वह इस कांड का जिक्र करना नहीं भूलीं.