लोकसभा सीटों के हिसाब से देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य महाराष्ट्र में भाजपा का गणित उलझता दिख रहा है. राज्य की कुल 48 सीटों में से 2014 के आम चुनाव में शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा को 41 सीटें मिलीं थीं. उस वक्त भाजपा ने 23 और शिवसेना ने 18 सीटों पर कब्जा जमाया था. कांग्रेस को केवल 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 4 सीटें मिली थीं. लेकिन उस चुनाव में एक मजेदार चीज यह हुआ था कि राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने भाजपा के पीएम उम्मीदवार रहे नरेंद्र मोदी का समर्थन किया था. लेकिन इस बार समीकरण उलझता दिखा रहा है. मनसे प्रमुख पिछले कुछ समय से लगातार पीएम मोदी की आलोचना कर रहे हैं.

इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मनसे को अपने पाले में लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. इसी क्रम में राकांपा नेता अजित पवार ने बुधवार को राज ठाकरे से मुलाकात की. राकांपा सूत्रों ने बताया कि पवार ने मनसे अध्यक्ष ठाकरे के आवास पर उनसे मुलाकात की. अतीत में उनके बीच वाकयुद्ध चलता रहता था. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बैठक करीब डेढ़ घंटे बातचीत हुई.

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पवार ने मंगलवार को कहा कि वह भाजपा-शिवसेना के बीच संभावित गठबंधन के खिलाफ लोकसभा चुनावों में मतों का विभाजन रोकने के लिए मनसे के साथ गठजोड़ के पक्षधर हैं. कांग्रेस और राकांपा फिलहाल महाराष्ट्र में विपक्ष का गठबंधन बनाने में मशगूल हैं. राज्य में 48 लोकसभा सीटे हैं जो उत्तर प्रदेश की 80 सीटों के बाद सबसे ज्यादा हैं.

वैसे वोट प्रतिशत के हिसाब से देखें तो राज्य में मनसे का कोई बड़ा जनाधार नहीं है. 2014 के राज्य विधानसभा चुनाव में मनसे को केवल 3.1 प्रतिशत वोट मिले थे. उसने विधानसभा की सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल की थी. मनसे ने लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था.

2014 के लोकसभा की बात करें तो उस वक्त भाजपा ने 27.3 फीसदी वोट शेयर हासिल कर 23 सीटों पर कब्जा किया था, जबकि उसकी सहयोगी रही शिवसेना को 20.6 फीसदी वोट और 18 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को 18.1 फीसदी वोट मिले थे. उसे केवल दो सीटों पर जीत मिली थी. उसकी सहयोगी राकांपा ने 16 फीसदी वोट के साथ चार सीटों पर कब्जा जमाया था.