नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह द्वारा कथित रूप से आचार संहिता का उल्लंघन करने संबंधी कांग्रेस की नौ शिकायतों पर छह मई तक निर्णय ले. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ को निर्वाचन आयोग ने सूचित किया कि मोदी और शाह के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के संबंध में कांग्रेस की 11 में से दो शिकायतों पर फैसला किया जा चुका है.

असम के सिलचर से कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्होंने इन दोनों के खिलाफ आयोग में 11 शिकायतें की थीं लेकिन अभी तक सिर्फ दो पर ही फैसला हुआ है. पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ताओं के शेष प्रतिवेदनों पर निर्वाचन आयोग इस मामले में सोमवार को (छह मई) सुनवाई होने से पहले निर्णय लेगा.’’

आयोग ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके भाषणों के लिए क्लीन चिट दे दी है. इनमें से पहला भाषण पिछले महीने लातूर में दिया गया था जिसमे उन्होंने पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं से अपना मत बालाकोट एयर स्ट्राइक के हीरो और पुलवामा हमले में मारे गये जवानों को समर्पित करने का अनुरोध किया. दूसरा भाषण, एक अप्रैल को वर्धा में दिया था जिसमे उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा केरल के एक संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने के संकेतों पर उन्हें आड़े हाथ लेते हुये कहा था कि इस सीट पर अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाता अधिक है.

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सुष्मिता देव ने अपनी शिकायत में आयोग पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ शिकायतों पर ‘निष्क्रियता’ बरतने का आरोप लगाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया था. याचिका में आरोप लगाया गया है कि भाजपा नेता पिछले चार सप्ताह से लगातार आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रहा है और निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस की 40 शिकायतों पर कोई निर्णय नहीं लिया है. याचिका में कहा गया था कि यह सर्वविदित है कि ये नेता लगातार वैमनस्य पैदा करने वाले भाषण दे रहे हैं और राजनीतिक प्रचार के लिये बार बार सशस्त्र बलों का उपयोग कर रहे हैं जबकि निर्वाचन आयोग ने इसके इस्तेमाल पर स्पष्ट प्रतिबंध लगा रखा है.

याचिका में आयोग के उन सर्कुलर का भी जिक्र किया है जिनमें राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने राजनीतिक चुनाव प्रचार में सशस्त्र बलों की तस्वीरों और धर्म का इस्तेमाल नहीं करें.