पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार बनेगी और जदयू इसमें शामिल होगा. मुख्यमंत्री ने हालांकि, स्पष्ट किया कि पार्टी अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता और अयोध्या विवाद जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर कायम रहेगी, जो भाजपा से भिन्न है. नीतीश ने उम्मीद जताई कि एनडीए आम चुनाव आसानी से जीतेगा और 23 मई को चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद नरेंद्र मोदी नई सरकार बनाएंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या जदयू नई सरकार में शामिल होगा, कुमार ने कहा, क्यों नहीं. गोडसे पर प्रज्ञा ठाकुर के बयान के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि यह निन्दनीय है. यह पूछे जाने पर कि क्या वह ठाकुर को बीजेपी से निष्कासित करने की मांग करेंगे, मुख्यमंत्री ने कहा, इस पर विचार किया जाना चाहिए. यद्यपि यह भाजपा का आंतरिक मामला है. वहीं, उन्‍होंने अपने धुर विरोधी लालू प्रसाद के इस दावे को रविवार को खारिज किया कि बीजेपी के साथ असहज होने के कारण चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर को आरजेडी के साथ फिर से गठजोड़ के लिए भेजा था.

प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करे बीजेपी
लोकसभा चुनाव प्रचार में कम ही दिखे कुमार ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने पर भोपाल से भाजपा की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर की निंद की और गर्मी के दौरान लंबी चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. गोडसे पर ठाकुर की टिप्पणी को निन्दनीय करार देते हुए कुमार ने उम्मीद जताई कि भाजपा उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर विचार करेगी.

गुलाम नबी आजाद के बयान को तवज्जो नहीं
राजभवन के पास एक मतदान केंद्र के बाहर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कुमार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के उस हालिया बयान को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि त्रिशंकु संसद की स्थिति में जदयू के साथ चुनाव बाद गठबंधन की संभावना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि आजाद के साथ उनके अच्छे संबंध हैं, लेकिन उनके हालिया बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए.

लालू के दावे को खारिज किया
जेल में बंद राजद प्रमुख लालू प्रसाद के इस दावे को कुमार ने खारिज किया कि उन्होंने जुलाई 2017 में भाजपा नीत एनडीए में वापसी के कुछ महीने बाद राजद के साथ पुन: गठजोड़ की संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए दूत के रूप में प्रशांत किशोर को भेजा था. मुख्यमंत्री ने लालू के दावे को खारिज करते हुए कहा, हम क्यों भेजेंगे. लालू ने यह दावा हाल में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में किया था. उनके इस दावे का समर्थन उनकी पत्नी राबड़ी देवी और पुत्र तेजस्वी यादव ने भी किया था. कुमार ने मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि प्रशांत किशोर मुद्दे पर खुद अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं. जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किशोर ने सिलसिलेवार ट्वीट कर लालू के दावे को खारिज किया था.

फरवरी-मार्च या अक्टूबर-नवंबर में होना चाहिए चुनाव
जेडीयू प्रमुख ने लंबी चुनावी प्रक्रिया पर अप्रसन्नता व्यक्त की और कहा, चुनाव सात चरणों में नहीं होने चाहिए. चरणों की संख्या दो या तीन से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसके अतिरिक्त, चुनाव या तो फरवरी-मार्च में या फिर अक्टूबर-नवंबर में होने चाहिए, जिससे कि लोगों को मौसम (गर्मी) की वजह से परेशानी न हो. कुमार ने कहा, राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम सबको इस बिंदु पर सहमत होना चाहिए. चुनाव खत्म हो जाने के बाद मैं जदयू प्रमुख के रूप में सभी दलों के अध्यक्षों को इस बारे में पत्र लिखूंगा.