नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के भोपाल से भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ रही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को आचार संहिता के उल्लंघन का एक और खामियाजा भुगतना पड़ा है. प्रज्ञा पर आरोप है कि उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा लगाए गए 3 दिनों के प्रतिबंध के बीच चुनाव प्रचार किया. प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर मुंबई हमले में शहीद हुए पूर्व आईपीएस हेमंत करकरे और बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर टिप्पणी का आरोप लगा था. इसको लेकर निर्वाचन आयोग ने उनके 72 घंटों तक चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी थी. आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आयोग के निर्देश का उल्लंघन किया और इन दिनों में मंदिरों और गोशालाओं में घूमकर चुनाव प्रचार किया. आपको बता दें कि भोपाल लोकसभा सीट से प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ कांग्रेस ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है.

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रविवार को भोपाल के जिला निर्वाची पदाधिकारी ने भाजपा उम्मीदवार को प्रतिबंध के बावजूद चुनाव प्रचार में शामिल होने को लेकर नोटिस भेजा. इस नोटिस में कहा गया है कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर आरोप है कि 3 दिनों के प्रतिबंध के दौरान भी उन्हें चुनाव प्रचार में संलग्न पाया गया. भोपाल के जिला निर्वाची पदाधिकारी ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को नोटिस भेजकर इसका जवाब मांगा है. आपको बता दें कि शहीद हेमंत करकरे के खिलाफ प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान को निर्वाचन आयोग ने अनुचित पाया था. इसको लेकर हालांकि प्रज्ञा ने माफी मांग ली थी, लेकिन आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए उन्हें 72 घंटों तक चुनाव प्रचार करने से रोक दिया था. यह प्रतिबंध 2 मई की सुबह 6 बजे से लागू हुआ था. साथ ही आयोग ने ठाकुर को भविष्य में इस तरह का बयान नहीं देने को लेकर चेतावनी भी दी थी.

बता दें कि 2 मई को निर्वाचन आयोग का प्रतिबंध लगने के बाद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मौन धारण कर भोपाल में विभिन्न मंदिरों में जाकर दर्शन किए थे. इस दौरान टीवी चैनलों पर उनके भजन-कीर्तन करने की तस्वीरें भी जारी हुई थीं. प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मंदिरों में दर्शन के दौरान वहां पाली जा रही गायों और बछड़ों को गुड़-घास खिलाने की तस्वीरें भी मीडिया में आई थीं. यह गौरतलब है कि प्रज्ञा ने भोपाल से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद शहीद हेमंत करकरे पर उन्हें मालेगांव बम धमाकों के मामले में प्रताड़ना देने का आरोप लगाया था. साथ ही ठाकुर ने यह भी कहा था कि उनके शाप के कारण ही 26/11 आतंकी हमलों के दौरान करकरे की मौत हुई थी. इसके अलावा ठाकुर ने कहा था कि अयोध्या में वर्ष 1992 में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस में शामिल रहने पर उन्हें गर्व है.