नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में इस बार का लोकसभा चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. खासकर, राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और चुनाव में अपना प्रदर्शन सुधारने के प्रयास में लगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तनातनी की खबरों के बीच यहां हो रहे मतदान पर देशभर के सियासी जानकारों की नजरें टिकी हुई हैं. भाजपा इस चुनाव में पश्चिम बंगाल में कम से कम 23 सीटों पर दावेदारी कर रही है, वहीं ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अपने वोट बचाए रखने के प्रयास में है. राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या देखते हुए राष्ट्रवाद, आतंकवाद, विदेशी घुसपैठियों का मसला जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं. ऐसे में एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस के नेता भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति के आरोप लगा रहे हैं, वहीं भाजपा सत्तारूढ़ पार्टी पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप मढ़ रही है. ऐसे में राज्य के कई मुस्लिम नेताओं और इमामों ने मुस्लिम मतदाताओं को पत्र लिखा है. 10 हजार से ज्यादा वोटरों को भेजे गए इस पत्र में मत देने के अधिकार की जानकारी दी गई है.

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हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने मतदाताओं को ये पत्र भेजे हैं. इन पत्रों में ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की राज्य इकाई के मुखिया कारी फजलुर रहमान, रेड रोड (Red Road) में ईद के मौके पर नमाज पढ़ाने वाले सबसे प्रमुख इमाम, नखोड़ा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक काशमी जैसे आला मुसलमान नेताओं के दस्तखत हैं. मुस्लिम मतदाताओं को भेजे गए ये पत्र उर्दू और बांग्ला भाषा में हैं. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में बांग्ला बोलने वाले मुस्लिमों की अच्छी-खासी तादाद को देखते हुए पत्र की भाषा चुनी गई है. इन पत्रों में वोटरों से कहा गया है, ‘लोकतंत्र में चुनाव से बड़ा विकल्प कोई नहीं है. हमें पांच साल में एक बार अपनी सरकार चुनने का मौका मिलता है. अगर एक भी वोट देने में गलती हुई तो इसके नतीजे 5 वर्षों तक भुगतने पड़ सकते हैं. इसलिए यह जरूरी है कि हम अपना वोट देने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि हम किसे चुन रहे हैं.’

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ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की राज्य इकाई के प्रमुख कारी फजलुर रहमान ने डीएनए वेबसाइट के साथ बातचीत में कहा कि मुसलमानों को उनके मताधिकार की याद दिलाने के लिए यह पत्र लिखे गए हैं. रहमान ने बताया, ‘मुस्लिम समाज के नेताओं ने मतदाताओं से अपील की है कि वोट देने का अवसर बार-बार नहीं आता. इसलिए हमें अपना वोट किसे देना है, इस पर सोच-विचार करना जरूरी है. हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि हमारा वोट उसे पड़े जो देश में धर्मनिरपेक्ष शासन लाए, न कि सांप्रदायिक तत्वों को सत्ता में जगह मिल जाए.’ यह पूछने पर कि राज्य में धर्मनिरपेक्ष पार्टी कौन सी है और वोटरों को किसे मत देना चाहिए, इसके जवाब में रहमान ने कहा, ‘जो दल सबसे मजबूत है और जिसके इस लोकसभा चुनाव में जीतने की उम्मीद सबसे ज्यादा है. बंगाल में सत्ताधारी दल के जीतने की उम्मीद सबसे अधिक है.’ मुस्लिम मतों के बिखराव को लेकर रहमान ने कहा, ‘मुस्लिम मतों का बिखराव रोकना जरूरी है, क्योंकि ऐसा न होने पर फासिस्ट ताकतों को मदद मिलेगी.’

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मुस्लिम मतदाताओं को चुनाव से पहले पत्र लिखे जाने को लेकर नखोड़ा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक काशमी ने कहा कि अल्पसंख्यक मतों के बिखराव को रोकने के लिए यह पहल की गई है. उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम नेताओं द्वारा भेजे गए ये पत्र देशभर में बांटे गए हैं, ताकि मुस्लिम मतों के बिखराव को रोका जा सके. जहां भी अल्पसंख्यकों के अधिकार, कानून व्यवस्था आदि जैसी समस्याएं है, वहां पर ये पत्र भेजे गए हैं.’ डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक पत्र में वोट देने की अपील के साथ-साथ इस्लाम धर्म के बुनियादी उसूलों का भी जिक्र है. इसमें सभी मुस्लिमों से पांचों वक्त की नमाज पढ़ने को भी कहा गया है.

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