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नालंदा लोकसभा सीटः यहां सीएम नीतीश कुमार का नाम ही काफी है...
लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में रविवार को बिहार की जिन आठ सीटों पर वोट डाले जाने हैं उनमें सबसे अहम नालंदा लोकसभा क्षेत्र है.
लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में रविवार को बिहार की जिन आठ सीटों पर वोट डाले जाने हैं उनमें सबसे अहम नालंदा लोकसभा क्षेत्र है. यह एक ऐसी सीट है जहां से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन यहां पर उनका नाम ही चलता है. नालंदा को नीतीश कुमार का अपना क्षेत्र माना जाता है. पिछले कई चुनावों से इस सीट पर नीतीश का दबदबा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में लोही लहर के दौरान भी जदयू यहां से जीत हासिल की थी. नालंदा के अलावा पुर्णिया ही एक मात्र सीट रही जहां से नीतीश की पार्टी ने जीत हासिल की थी. गौरतलब है कि 2014 का लोकसभा चुनाव जदयू, भाजपा और राजद ने अलग-अलग लड़ा था. 2014 में जदयू के कौशलेंद्र कुमार ने लोजपा के उम्मीदवार को हराया था.
अंतिम चरण में बिहार की नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकट और जहानाबाद सीटों पर मतदान होगा. पिछली बार इनमें से सात सीट भाजपा और एक सीट आरएलएसपी ने जीती थी. इस बार पाटलिपुत्र सीट से केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव का मुकाबला राजद उम्मीदवार मीसा भारती से है. वहीं पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद का मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार शत्रुध्न सिन्हा से है.
इस बार भी जदयू ने कौशलेंद्र को उम्मीदवार बनाया है. दूसरी तरफ आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने अशोक कुमार आजाद चंद्रवंशी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वह जीतन राम मांझी की हम पार्टी से उम्मीदवार हैं. अशोक कुमार कहार जाति से आते हैं और वह मूल रूप से गया जिले के रहने वाले हैं. कहार जाति अत्यंत पिछड़ी जाति वर्ग में आती है. अशोक कुमार मजबूत उम्मीदवार हैं. पिछले चुनाव में कौशलेंद्र कुमार केवल 10 हजार वोटों से जीते थे. लेकिन नीतीश के नाम के सहारे उनकी नैया इस बार भी पार होने की उम्मीद है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय जनता अपने मौजूदा सांसद कौशलेंद्र से नाराज तो है लेकिन वह नीतीश के नाम एक बार फिर उन्हें वोट देने से परहेज नहीं करने वाली.
नालंदा में नीतीश के मजबूत होने का मुख्य कारण उनकी बिरादरी के लोगों की अच्छी संख्या है. नीतीश कुर्मी बिरादरी से आते हैं और नालंदा में उनकी जाति के करीब 25 फीसदी वोटर हैं. दूसरी तरफ कुर्मी की सहोदर बिरादरी मानी जाने वाली कोइरी जाति के लोगों की संख्या करीब 10 फीसदी है. यहां पर अत्यंत पिछड़ी जाति की संख्या करीब 25 फीसदी है. इन्हें नीतीश का सॉलिड वोट बैंक माना जाता है. दूसरी तरफ यादव करीब 20 फीसदी, मुस्लिम 8 फीसदी और अगड़ी जातियों के करीब 9 फीसदी वोटर हैं.
इस लोकसभा क्षेत्र के तहत अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा और हरनौत समेत 7 विधानसभा सीटें आती हैं. करीब 22 लाख वोटर हैं. 2014 के लोकसभा चुवाव में जदूय के कौशलेन्द्र कुमार को 3 लाख 21 हजार 982 वोट मिले थे. एनडीए की सहयोगी पार्टी रही लोजपा के उम्मीदवार सत्यानंद शर्मा को 3 लाख 12 हजार 355 वोट मिले थे.
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