नई दिल्ली. असल मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने के उद्देश्य से कई सिविल सोसाइटी समूह और जनांदोलन एकजुट होकर 23 मार्च को देश में सैकड़ों जगहों पर कार्यक्रम करेंगे. ‘देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा’ के बैनर तले जनता के बुनियादी मुद्दों को राजनीति के केंद्र में लाया जाएगा. इसके आयोजकों का कहना है कि किसान, नौजवान और संविधान जैसे असल मुद्दों से भटक चुके राजनीतिक विमर्श को वापस स्थापित किया जाएगा.

स्वराज इंडिया ने एक बयान में कहा कि कौन सी पार्टी चुनाव जीतती है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि चुनाव जनता के असल मुद्दों पर लड़ा जाए. दुर्भाग्यवश पिछले एक महीने में बेरोजगारी, कृषि बदहाली, पर्यावरण, भ्रष्टाचार, सामाजिक सौहार्द और संस्थानों पर आक्रमण के सवालों को पीछे कर दिया गया है. बाकी सभी मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा की चादर में छिपाने की कोशिश हो रही है. ‘मेरा देश, मेरा वोट, मेरा मुद्दा’ कार्यक्रम के जरिये सरकार के पांच साल के कामकाज की समीक्षा होगी, सत्ता में बैठी पार्टी से जवाब, हिसाब और लेखाजोखा लिया जाएगा.

स्वराज इंडिया ने कहा, “23 मार्च की तारीख का भारत में ऐतिहासिक महत्व कई मायनों में है. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अलावा यह राममनोहर लोहिया की जयंती और आपातकाल खत्म किए जाने की तारीख भी है. इसी तारीख से हम लोकसभा चुनावों के मुद्दों पर सकारात्मक असर डालने के लिए ‘देश मेरा, वोट मेरा, मुद्दा मेरा’ का देशभर में आयोजन कर रहे हैं.

अभियान सुबह असम के तिनसुकिया में शुरू होकर देर रात्रि में नन्दरबार, महाराष्ट्र में एक आदिवासी सम्मेलन के साथ सम्पन्न होगा और इस बीच देशभर के अठारह राज्यों के 400 से अधिक केंद्रों पर, जिसमें दिल्ली, इंदौर, भोपाल, बीकानेर, जयपुर, गुवाहाटी, रांची, पटना, लखनऊ, चंडीगढ़, अहमदाबाद, हैदराबाद, बैंगलोर, चेन्नई, पुणे शामिल हैं, विभिन्न रूपों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.