नोएडा. लोकसभा चुनाव का दौर है. आप लोग विकास, तरक्की, खुशहाली जैसे शब्दों से बने और बुने भाषण रोज सुन रहे होंगे. विभिन्न दलों के नेता देश की राजधानी दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर गांवों तक पहुंचकर वहां विकास की किरण पहुंचाने का दावा कर रहे होंगे. लेकिन राजधानी के करीब आज भी एक ऐसा गांव है, जहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के बारे में आज भी सिर्फ बातें ही करते हैं. ऐसे में जबकि केंद्र सरकार देश की 95 फीसदी आबादी को आधार कार्ड से जोड़ने और इससे जुड़ी तमाम सुविधाएं देने का दावा करती है, दिल्ली के पास नोएडा के दलेलपुर गांवों के लोगों को इसकी जानकारी नहीं है. उनके पास आधार तो क्या, राशन कार्ड भी नहीं है. अब जबकि फिर से चुनाव का मौसम आ गया है, तो प्रशासन को इस गांव की याद आई है. विकास या खुशहाली के लिए नहीं, बल्कि इन गांवों के लोगों के वोट के लिए.

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जी हां, नोएडा जिला प्रशासन ने दलेलपुर गांवों के लोगों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए एक मोटरबोट किराए पर ली है. मतदान के दिन इस गांव के मतदाताओं को इसी मोटरबोट से मतदान केंद्र तक लाया जाएगा और तब वे वोट डाल सकेंगे. दरअसल, गौतमबुद्धनगर प्रशासन ने यमुना पार के दलेलपुर गांव के मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में मदद के लिए एक मोटरबोट किराए पर ली है. गुरुवार को इस संबंध में जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है. गौतमबुद्धनगर निर्वाचन क्षेत्र में दलेलपुर एकमात्र ऐसा गांव है जो यमुना नदी पार कर हरियाणा की ओर स्थित है. लेकिन यह हिस्सा उत्तर प्रदेश के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आता है.

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गांव के लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि इलाके में बेहतर संचार एवं संपर्क व्यवस्था नहीं है . इसी के चलते उन्होंने हाल ही में लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की थी. एक मोटरबोट के मालिक को गुरुवार को भेजे गए एक सरकारी पत्र में कहा गया है कि मतदान के दिन 11 अप्रैल को मतदाताओं की सुविधा के लिए उसकी बोट किराए पर ली गई है. बोट मालिक को भेजे गए आधिकारिक पत्र में कहा गया है, ‘‘ मतदान के दिन यमुना पार स्थित दलेलपुर से मतदाताओं को लाने ले जाने के लिए आपकी बोट की सेवाएं ली गई हैं. 11 अप्रैल को मोटरबोट सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक नदी के फेरे लगाएगी.’’ इसमें कहा गया है, ‘‘ इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए.’’

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दलेलपुर गांव के लोग मतदान केंद्र 480 और 481 में अपने वोट डालेंगे जो कि करीब 12 किलोमीटर दूर गुलावली गांव में बनाए गए हैं. दलेलपुर गांव में करीब 250 परिवार रहते हैं और यहां वर्ष 2014 में करीब 200 मतदाता थे जिनकी संख्या इस बार घटकर मात्र 28 तक रह गई है. इस संवाददाता ने गांव के हाल के दौरे में पाया था कि यहां पर न तो पक्की गलियां हैं, न ही बिजली. जल मल निकासी व्यवस्था भी ठीक नहीं है. अधिकतर जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था गांववालों को अपने आप करनी पड़ती है. गांव के बाशिंदों का दावा है कि उनके पास न तो आधार कार्ड है और ही राशन कार्ड.

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दलेलपुर राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित है लेकिन यहां पहुंचने में पसीने छूट जाते हैं. गांव को नोएडा से जोड़ने के लिए कोई पुल नहीं है. गांववालों का कहना है कि नोएडा तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है सड़ांध मारती प्रदूषित यमुना नदी को बोट से पार करना. इसके बाद कच्चे धूलभरे रास्ते पर तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. अगर आपको सड़क मार्ग से इस गांव तक पहुंचना है तो आपको इसके लिए दिल्ली और फरीदाबाद की एक ओर की करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. सोचने वाली बात है कि आजादी के 70 साल बाद विकास के जिस दावे के साथ राजनेता वोट मांगने का दावा करते हैं, दलेलपुर जैसे गांवों में इन दावों की पोल खुलती नजर आती है.

(इनपुट – एजेंसी)

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