नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका का संज्ञान लिया, जिसमें मांग की गयी है कि अगर राजनीतिक दलों के प्रवक्ता चुनावों से पहले मीडिया में जाति तथा धर्म के आधार पर बयान देते हैं तो चुनाव आयोग को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाएं. Also Read - दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? केंद्र सरकार ने दिया जवाब- केजरीवाल सरकार की बताई गलती

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता तथा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने शारजाह (यूएई) में रहने वाले एक एनआरआई योग शिक्षक की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. Also Read - Loan Moratorium Case: सुप्रीम कोर्ट का सरकार को निर्देश, ऋण पर ब्याज के मामले में अपना निर्णय लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएं

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नेताओं के सांप्रदायिक तथा जातीय चुनावी भाषण और बयानों का जिक्र करते हुए हरप्रीत मनसुखानी ने कहा कि उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष माहौल बनाये रखने के लिए याचिका दाखिल की है. वकील अरुप बनर्जी के माध्यम से दाखिल याचिका में पूरी चुनावी प्रक्रिया पर करीब से नजर रखने और चुनाव आयुक्त की निष्ठा की पड़ताल करने के लिए उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में एक समिति बनाने की भी मांग की गई है.