नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के तीन चरणों के मतदान के बाद बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी एक बार फिर चर्चा में थे. इस बार उनका जिक्र बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार के साथ उनकी ‘गैर-राजनीतिक’ बातचीत को लेकर हो रहा था. अक्षय कुमार, पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर फिल्में बनाने को लेकर चर्चा में रहे हैं. इसलिए पीएम मोदी के साथ उनकी ‘नॉन-पॉलिटिकल’ बातचीत में क्या बातें होंगी, इसको लेकर देशभर में जिज्ञासा थी. बहरहाल, लगभग घंटेभर तक चली पीएम मोदी और अक्षय कुमार की इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने अपने बचपन के किस्से, हंसी-मजाक के पल, घर-परिवार की बातें, देश-दुनिया के अनुभव, विपक्षी दलों और उनके नेताओं से जुड़ी बातें, कई विषयों पर बात की. जानिए इस बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु.

प्रधानमंत्री बनने के बारे में
1- पीएम मोदी ने कहा- कभी मेरे मन में प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया और सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं है. मेरा जो फैमिली बैकग्राउंड है, उसमें मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गांव को गुड़ खिला देती.

2- अगर मैं प्रधानमंत्री बनकर घर से निकला होता, तो मेरे मन में रहता कि सब वहीं रहे. लेकिन मैंने बहुत छोटी उम्र में घर छोड़ दिया था और इसलिए लगाव, मोहमाया सब मेरी ट्रेनिंग के कारण छूट गया.

गुस्सा करते हैं या नहीं
3- पीएम मोदी ने कहा- मुझे मेरे जीवन के शुरुआती 18-22 वर्षों की जीवन यात्रा के दौरान हिमालय से लेकर संन्‍यास के अनुभव ने अनुशासन और आत्‍म-नियंत्रण के बारे में सिखाया है. इस कारण संभव है कि मन में गुस्‍सा आता हो, लेकिन आज तक चपरासी से लेकर चीफ सेक्रेट्री के स्‍तर तक कभी गुस्‍से को व्‍यक्‍त करने का अवसर नहीं मिला. इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहा लेकिन मुझे कभी गुस्सा व्यक्त करने का अवसर नहीं आया: मैं हमेशा लोगों को प्रेरित करता हूं.

4- मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता. अक्सर कोशिश करता हूं कि किसी काम को कहा तो उसमें खुद इन्वॉल्व हो जाऊं. सीखता हूं और सिखाता भी हूं और टीम बनाता चला जाता हूं.

बचपन के बारे में
5- पीएम मोदी ने अक्षय कुमार के सवाल कि क्या वह आम खाते हैं, का जवाब देते हुए कहा- ‘हां मैं आम खाता भी हूं और मुझे पसंद भी है. गुजरात में तो आमरस की परंपरा भी है. जब मैं छोटा था तो आम खरीदना हमारे बस की बात नहीं थी. लेकिन हम जब खेतों में जाते थे तो हमारे किसान, जो बड़े उदार होते हैं, आम खाने से नहीं रोकते थे. हां आम चोरी करने पर डांटते जरूर थे. मुझे पेड़ पर लगे पके हुए आम खाना ज्‍यादा पसंद था. बाद में जैसे-जैसे बड़े होते गए कई वैरायिटी के आम खाने लगे. लेकिन अब आम खाने की इस आदत को कंट्रोल करना पड़ता है. सोचना पड़ता है कि इतना खाऊं या नहीं खाऊं’.

6- बचपन में मेरा स्वाभाव था किताबें पढ़ना, बड़े-बड़े लोगों का जीवन पढ़ता था. कभी फ़ौज वाले निकलते थे, तो बच्चों की तरह खड़ा होकर उन्हें सैल्यूट करता था.

दोस्ती के सवाल पर
7- पीएम मोदी ने कहा कि देश-विदेश सभी जगहों पर उन्होंने ढेर सारे दोस्त बनाए हैं. देश में अपनी पार्टी के अलावा विपक्षी दलों में भी उनके कई दोस्त हैं. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद जैसे लोगों का भी जिक्र किया. साथ ही दोस्तों द्वारा उनको संदेश भेजने की बात भी सुनाई.

8- पीएम ने कहा- ममता दीदी साल में आज भी मेरे लिए एक-दो कुर्ते भेजती हैं. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी साल में 3-4 बार खास तौर पर ढाका से मिठाई भेजती हैं. ममता दीदी को पता चला तो वो भी साल में एक-दो बार मिठाई जरूर भेज देती हैं. उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से दोस्ती के भी किस्से सुनाए.

भविष्य की योजना पर
9- पीएम मोदी ने अक्षय कुमार के सवाल कि अलादीन का चिराग मिलने पर वो क्या मांगेंगे, पर जवाब दिया- मैं सबसे पहले नई पीढ़ी को कहूंगा कि ये अलादीन पर विश्वास करना बंद करें. इससे आलस का भाव आता है. ये हमारे यहां का चिंतन नहीं है, हमारे यहां का चिंतन परिश्रम का है.

10- रिटायरमेंट प्लान पर उन्होंने कहा- जिम्मेवारी ही मेरी जिंदगी है, मुझे परवाह नहीं होती है कि मुझे अपने को इंगेज करने के लिए कुछ करना पड़ेगा. मैं शरीर का कण-कण और जीवन का पल-पल किसी ना किसी मिशन पर ही खपाऊंगा.